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कौशाम्बी में 20 लाख की अंग्रेजी शराब बरामद

Thu, 19 Jan 2017 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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 इलाहाबाद-कौशाम्बी के सरहद मंदर मोड़ से मंगलवार की रात एसटीएफ व पूरामुफ्ती थाने की पुलिस ने एक डीसीएम से 22 लाख की अंग्रेजी शराब बरामद की। हरियाणा में बनी शराब की पेटियों को सब्जी की बोरियों के नीचे छिपाकर रखा गया था। पुलिस ने अलीगढ़ के दो तस्करों के साथ इलाहाबाद के एक शातिर को भी पकड़ा है। इलाहाबाद का शातिर युवक शराब के खेप लेने के लिए मंदर मोड़ पर अपनी लग्जरी कार से आया था।
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   स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) के इंस्पेक्टर केशव चंद्र राय व पूरामुफ्ती एसओ धर्मेंद्र प्रताप सिंह मंगलवार की रात मंदर मोड़ पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। करीब दो घंटे की जांच के बाद पुलिस को सूचना मिली कि सड़क किनारे खड़ी डीसीएम का चालक किसी कार के चालक को खोज रहा है। पुलिस को शंका हुई तो उसने चालक खेम सिंह पुत्र बच्चू लाल व खलासी प्रेम सिंह पुत्र सूरन सिंह निवासीगण केशवपुर, लोंहदा, अलीगढ़ को धर दबोचा। इसके बाद डीसीएम की पुलिस ने तलाशी ली तो उसमें से सब्जी की बोरियों के नीचे से हरियाणा में बनी 210 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इनमें रॉयल स्टेग, इम्पीरियल ब्लू, बैग पाइपर, इम्पैक्ट आदि ब्रांड थे।

हॉफ व फुल बोतल की पेटियां थीं। चालक से पूछताछ की गई तो उसने एक इस्टीम गाड़ी का नंबर दिया। साथ ही बताया कि इसी इस्टीम वाले को उसको यह शराब की खेप देनी थी। पुलिस ने इस्टीम गाड़ी को भी ढूंढ़ निकाला। इस्टीम से इलाहाबाद के भुसौली टोला (खुल्दाबाद) मनीष कुशवाहा पुत्र सीताराम को गिरफ्तार किया। पुलिस ने पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों का चालान कर दिया है। पूरामुफ्ती एसओ धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि शराब की कीमत 20 लाख के करीब है। कहा कि यह तस्कर इसके पहले भी इलाहाबाद में अवैध तरीके से अंग्रेजी शराब की आपूर्ति कर चुके हैं।
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मोबाइल पर नहीं होती बात, दिया जाता है गाड़ी का नंबर
शराब की तस्करी करने वाले पुलिस से बचने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। हरियाणा से शराब की खेप लेकर चलने वाले चालक व खलासियों की बातचीत नहीं होती है। न ही वह मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। उनको सप्लाई किसको देना है। यह  भी नहीं बताया जाता है। उनको केवल जगह और गाड़ी का नंबर एक पर्ची पर लिखकर दिया जाता है। निश्चित स्थान पर यदि गाड़ी दिखती है तो चालक जाकर बातचीत करता है। इसके बाद सप्लाई लेने वाला शराब की खेप लेकर चला जाता है। माफिया के इस खेल के कारण पुलिस को इस अवैध कारोबार की भनक नहीं लगती है। पुलिस का सारा फोकस सर्विलांस पर होता है। पुलिस से बचने के लिए यह नया तरीका तस्करों ने निकाला है। तस्करों का सरगना कौन है, इसका पता लगाने का प्रयास पुलिस कर रही है।

तस्करों को मिलता है ईनाम
शराब की तस्करी करने वालों को माफिया ईनाम भी देते हैं। पूछताछ के दौरान खेम सिंह ने बताया कि इसके पहले वह करीब चार बार यहां अंग्रेजी शराब की सप्लाई कर चुका है। बताया कि समय पर शराब की खेप पहुंचाने पर उनको ईनाम भी मिलता है। इसके अलावा उन्हें रास्ते के खर्च के लिए मुंहमांगी रकम दी जाती है।

शराब आते ही बदल दिया जाता है होलोग्राम
हरियाणा की शराब की खेप मिलते ही, स्थानीय तस्कर उसका होलोग्राम बदल देते हैं। इसके बाद वह इस शराब को दुकानों में सप्लाई कर देते हैं। हरियाणा की शराब सस्ती होने के कारण दुकानदार इसी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। इस अवैध कारोबार में तस्करों को मोटी रकम का फायदा भी होता है।
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