जिले के आठ बालू घाटों से अंतिम दौर में कारोबारियों ने बड़े पैमाने पर बालू जगह-जगह अवैध रूप से डंप कर लिया है। बगैर परमीशन के डंप किए गए बालू की बिक्री रात के अंधेरे में शुरू हो गई है। इससे विभाग को जहां लाखों रुपए राजस्व की चपत लग रही है वहीं, कारोबारी मालामाल हो रहे हैं।
जिले के आठ यमुना बालू घाटों का पट्टा आठ दिसंबर की आधी रात को बंद हो गया है। बालू घाट बंद होने को लेकर कारोबारी पहले से संजीदा थे। लगभग छह माह बालू का पट्टा बंद रहने को लेकर छोटे-छोटे कारोबारियों ने लगभग सौ स्थानों पर अवैध बालू डंप कर रखा है। बानगी के तौर पर भरवारी से महेवाघाट मार्ग को लिया जा सकता है।
इस मार्ग पर कारोबारियों ने सैकड़ों ट्रक बालू डंप कर रखी है। इलाकाई लोगों की मानें तो अवैध डंप करने वाले अपनी बालू रात के अंधेरे में इलाके के जरूरतमंदों को आपूर्ति करते हैं। बगैर प्रपत्र सी के बालू का परिवहन होने से विभाग को लाखों रुपए राजस्व की चपत लग रही है। मामले में खनन निरीक्षक राज रंजन से पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इनकार किया। उनका कहना है कि यदि कहीं अवैध बालू डंप है तो उसकी जांच कराकर उसे सीज किया जाएगा।