फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बलात्कार के आरोपी पिता का 151 में चालान

Sun, 17 Jul 2016 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन
दोआबा की पुलिस अपराधों को छिपाने में बड़ी माहिर है। पीड़ित न्याय के लिए दर-दर की ठोंकरे खा रहे हैं और पुलिस अपराधों को छिपाकर आंकड़ाें की बाजीगरी करने में मस्त है। बानगी के तौर पर कौशाम्बी थानाक्षेत्र की ताजी घटना को लिया जा सकता है। बेटी के साथ चापड़ की नोक पर बलात्कार करने वाले पिता का पुलिस ने 151 के तहत चालान भेज दिया है। नवागत थानेदार के इस कारनामे की चर्चा रविवार को पूरे क्षेत्र में रही।
विज्ञापन


कौशाम्बी थानाक्षेत्र के एक गांव में 12 जुलाई की रात एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी का हाथ पैर बांधकर उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। इसके बाद चापड़ की नोक पर जवान बेटी को वासना का शिकार बना डाला। इसके बाद सुबह होने पर मां-बेटी को धमकी दिया कि कहीं मुंह खोला तो जान से मार डालेगा। मौका देखकर 14 जुलाई को मां-बेटी कौशाम्बी थाने पहुंची और घटना की तहरीर पुलिस को दिया। तहरीर लेने के बाद तीन दिन तक कौशाम्बी पुलिस मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। शनिवार को मामले में जब एसओ से पूछा गया तो उन्होंने जांच करने की बात कहकर फोन काट दिया। रविवार की सुबह मामला जब फैला तो आनन-फानन में आरोपी पिता की गिरफ्तारी कर 151 में चालान कर दिया। मामले में थानाध्यक्ष का कहना है कि बलात्कार जैसी कोई घटना नहीं हुई। मां-बेटी और पिता के बीच घरेलू विवाद जांच में पाया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या मां और बेटी दोनों विक्षिप्त हैं जो अपने ही बाप और पति पर बेटी से जबरन मुंह काला करने का आरोप लगा रही हैं।

डॉक्टरी परीक्षण के लिए क्यों नहीं भेजी गई पीड़िता
कौशाम्बी थानाक्षेत्र में एक बाप ने 12 जुलाई को अपनी बेटी के साथ मुंह काला किया। मामले की तहरीर शिकार हुई बेटी ने 14 जुलाई को थाने पहुंचकर कौशाम्बी पुलिस को दी। पीड़िता ने ताजी घटना के अलावा यह भी दर्शाया था कि आरोपी ने एक साल पहले भी उसे हवस का शिकार बनाया था। दूसरी बार शिकार होने के बाद उससे रहा नहीं गया तो वह मामले की तहरीर दे दी है। पुलिस ने तहरीर तो ले लिया और कार्रवाई का भरोसा दिलाकर पीड़िता को उसकी मां के साथ घर भेज दिया। यहीं से कौशाम्बी पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह से संदिग्ध प्रतीत होने लगती है। सवाल यह है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की तहरीर मिलने के बाद पीड़िता को डॉक्टरी परीक्षण के लिए पुलिस अस्पताल लेकर क्यों नहीं गई। उधर तहरीर मिलने के बाद तीन दिन तक हीलाहवाली क्यों करती रही। कुछ भी हो मामले में कौशाम्बी पुलिस की भूमिका जरा भी साफ सुथरी नहीं है। ऐसे में मामले पर उच्चाधिकारियों को निगाह डालनी होगी।
विज्ञापन


मामला संज्ञान में आया है। बेटी द्वारा पिता पर बलात्कार का आरोप लगाया जाना गंभीर मामला है। कोई निर्दोष जेल न चला जाए इसे संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच सदर सीओ को सौंप दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

वीके मिश्र, एसपी, कौशाम्बी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें