भखंदा गांव के राधेश्याम निषाद के परिजनों के साथ 25 साल से खूनी खेल खेला जा रहा है। कौन दुश्मन है? क्यों वह इस परिवार के लोगों को मौत के घाट उतार रहा है, आज तक इसका खुलासा नहीं हो सका। राधेश्याम के पिता व चाचा के साथ चचेरे भाई की गोली मार हत्या की जा चुकी है। गुरुवार को भोर में उसके बेटे को गोली मारी गई, जो इलाहाबाद के एक निजी अस्पताल में जीवन-मौत से जूझ रहा है।
सरायअकिल थाना क्षेत्र के भखंदा गांव निवासी राधेश्याम निषाद मजदूर है। इस परिवार के सदस्यों के खून का कोई प्यासा है। सबसे से पहले उसके चाचा रामस्वरूप की गोली मार कर हत्या की गई। कुछ साल बाद चचेरे भाई केदार नाथ को मौत की नींद सुला दिया गया। अभी तीन साल पहले राधेश्याम के पिता मैकू लाल निषाद की गोली मार हत्या कर दी गई। तीन मौतों का गम अभी परिवार भुला नहीं सका था कि बृहस्पतिवार की भोर उसके बेटे श्याम निषाद (16) को गोली मार दी गई।
इस परिवार के साथ यह खूनी खेल कौन खेल रहा है। यह राधेश्याम व उसके परिजन अब तक नहीं जान सके। तीन-तीन लोगों की हत्या हो गई, लेकिन दुश्मन अब तक बेनकाब नहीं हो सका। पुलिस की ढिलाई अथवा लापरवाही का नतीजा यह रहा कि अबकी उसके बेटे श्याम को निशाना बनाया गया। गोली उसकी पीठ में लगी है। गंभीर हालत में उसे एसआरएन में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। राधेश्याम के परिजनों की हत्या के सभी मामलों में अज्ञात कातिलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
परिजनाें की खामोशी में छिपा रहस्य
भखंदा गांव के राधेश्याम के परिवार के साथ चल रहे इस खूनी खेल का रहस्य परिजनों की खामोशी में छिपा हुआ है। कौन शातिर है जो एक के बाद सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे रहा है। परिजन भी पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। परिजनों की चुप्पी टूटने के बाद ही रहस्य का पर्दाफाश होना संभव है।
वारदात के पीछे कहीं लाल सोना तो नहीं!
सरायअकिल के भखंदा गांव निवासी राधेश्याम निषाद के साथ हो रही लगातार वारदात के पीछे कहीं लाल सोना यानि बालू तो नहीं है? हालांकि पुलिस इस घटना को कई पहलुओं से देख रही है। वारदात के पीछे विवाद की असली वजह आज तक सामने नहीं आ सकी। किशोर को गोली मारे जाने के बाद से तमाम तरह की इलाके में चर्चाएं हैं