पिपरी के गांजा गांव की रचना सिंह आत्महत्या मामले के दो आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं। चार दिन बाद भी पुलिस इनको पकड़ नहीं सकी है। महकमे की खासी किरकिरी होने के बाद भी पुलिस आरोपियों को ढूंढ़ने में नाकाम है। इससे पुलिस अफसरों पर खासा दबाव बना हुआ है। थाने की कमान संभालते ही इंस्पेक्टर विपिन त्रिवेदी ने भी खूब हाथ-पैर चलाए, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लग सके हैं।
पिपरी के गांजा गांव की रचना सिंह बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। गुरुवार को उसके साथ रामभजन सिंह डिग्री कालेज के बाहर शेरपुर गांव के आशीष सिंह यादव व जितेंद्र सिंह यादव ने छेड़खानी की थी। कालेज के शिक्षकों को भी इसकी जानकारी थी। शिक्षकों ने आशीष यादव व जितेंद्र को डांटा फटकारा था। इसके बाद रचना सिंह के चचेरे भाई आलोक सिंह व चाचा शिवपूजन सिंह ने पिपरी थाने जाकर इसकी शिकायत की थी। इसके बाद भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई थी। शुक्रवार को रहस्यमय परिस्थितियों में आलोक सिंह व शिवपूजन सिंह के खिलाफ उल्टा मकदूमपुर चौकी में मामला दर्ज हो गया।
इसके बाद रचना सिंह ने शनिवार को फांसी लगाकर जान दे दी थी। रचना सिंह के मरने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। रचना सिंह के चाचा देवेंद्र सिंह एसएसपी इलाहाबाद के चालक हैं। उन्होंने अधिकारियों को सूचना दी तो खलबली मच गई। मामले में इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र व चौकी प्रभारी राकेश शर्मा निलंबित हुए। इसके बाद आशीष यादव व जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में दो अन्य आरोपी हैं। इन आरोपियों को पुलिस अभी तक नहीं पकड़ पाई है। इस घटना की कौशाम्बी पुलिस की पूरे यूपी में खासी किरकिरी कराई है। घटना सुर्खियों में बनी है। इसके बावजूद फरार दो आरोपियों को पुलिस अब तक ढूंढ़ने में नाकाम है। इससे परिजन आक्रोशित हैं। रचना के चचेरे भाई भानु सिंह, आलोक सिंह का कहना है कि इस पूरी घटना के लिए पिपरी पुलिस जिम्मेदार है।
कानूनी दांव पेच के सहारे बचने में लगे हैं इंस्पेक्टर और दरोगा
रचना सिंह प्रकरण में निलंबित हुए इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र व दरोगा राकेश शर्मा को फिलहाल अभी तक बचने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। घटनास्थल का पेच फंसाकर दरोगा राकेश शर्मा राहत पाने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं इंस्पेक्टर घटना की बारीकियों से खेलकर अपनी गर्दन बचाने में लगे हैं। इंस्पेक्टर और दरोगा कानूनी दांवपेंच खेलने पर उतारू हो गए हैं।
रचना सिंह प्रकरण कौशाम्बी पुलिस के गले की फांस बन चुका है। डीजी कार्यालय की भी निगाह इस मामले में बराबर बनी हुई है। पुलिस के आला अधिकारी इस पूरे मामले को जल्द से जल्द निपटाकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में निलंबित हुए इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र पर चौकी प्रभारी राकेश शर्मा का तर्क भारी पड़ रहा है। चौकी प्रभारी राकेश शर्मा ने घटनास्थल का पेच फंसा कर इंस्पेक्टर को मझधार में छोड़ दिया है।
राकेश शर्मा का तर्क है कि राम भजन सिंह डिग्री कालेज सेंवढ़ा में पड़ता है। घटनास्थल पिपरी थाने की पुलिस के क्षेत्र में आता है, न ही मकदूमपुर चौकी क्षेत्र में। गुरुवार को छेड़खानी की हुई घटना से उनका कोई लेनादेना नहीं था। शुक्रवार को जितेंद्र सिंह यादव जब चौकी मकदूमपुर में तहरीर देने आया था तो वह घायल था। छेड़खानी का आरोप लगाया था। छेड़खानी की पीड़िता भी साथ में थी, इसलिए मामला दर्ज किया गया। चौकी प्रभारी राकेश शर्मा के इस पलटवार से पिपरी थाने की पुलिस चित हो गई है। इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि छेड़खानी की घटना की रिपोर्ट नहीं दर्ज है। उनका कहना है कि उनको तहरीर नहीं मिली थी।
परिवार के लोग यह कहकर चले गए थे वह सुबह आएंगे। दूसरे दिन एक और नई घटना हो गई, जिसका क्षेत्र मकदूमपुर चौकी आता था। अब उनके इस तर्क को मानने को कोई तैयार नहीं। इस मामले में बुरी तरह से फंसे इंस्पेक्टर को बचने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। वहीं मामला है कि ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है। डीजी कार्यालय व आईजी ने दखल देकर पुलिस अधिकारियों की नींद उड़ा रखी है। इस पूरे प्रकरण में अधिकारी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।