पड़ोसी बालक की पिटाई करने के आरोप में फंसे कक्षा आठ के तीन छात्रों को नगर कोतवाली पुलिस ने गुरुवार को वर्दी में घर से पकड़ा। इसके बाद वर्दी में ही बच्चों को कोतवाली से सरकारी जीप में एसपी कार्यालय तक ले जाया गया। बाल अधिकारों की धज्जियां उड़ाने वाले मातहतों को अफसर बचाने में जुटे हुए हैं।
नगर कोतवाली क्षेत्र के रामपुर बसोहरा गांव का बेनी प्रसाद पुत्र रामसजीवन इलाहाबाद में रहकर मजदूरी करता है। उसने बताया कि उसका 12 वर्षीय बेटा राहुल छह सितम्बर को गांव के बाहर खेत में शौच कर रहा था। तभी कक्षा आठ में पढ़ने वाले पड़ोस के तीन बालक वहां पहुंचे और राहुल को अपशब्द कहने लगे। विरोध करने पर पीट दिया। पीड़ित के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ उसी रोज उसने पुलिस को तहरीर दी थी। पर, पुलिस ने कार्रवाई के बजाए समझौता करने की बात कहकर लौटा दिया। गुरुवार को जिला अस्पताल में भर्ती राहुल की हालत बिगड़ी तो पुलिस ने आननफानन तीनों आरोपियो के खिलाफ एससीएसटी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। इसके बाद वर्दी में पुलिस वालों ने घर पर दबिश देकर आरोपी बच्चों को हिरासत में लिया। कोतवाली से सरकारी जीप में ही उन्हें एसपी कार्यालय तक ले जाया गया। जहां एसपी ने पूछताछ की। बतादें कि नियमानुसार बच्चों की गिरफ्तारी अथवा उनसे पूछताछ वर्दी में नहीं की जा सकती। उन्हें सरकारी जीप में भी नहीं बैठाया जा सकता। फिर इन बच्चों का तो अपराध भी इतना गंभीर प्रवित्ति का नहीं था।
बच्चों को वर्दी में नहीं गिरफ्तार किया जा सकता है। उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए हर कोतवाली में अलग से पुलिस टीम बनती है। बाकायदा इसके प्रभारी भी नियुक्त होते हैं। मंझनपुर पुलिस ने ऐसा किया है तो गलत है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जयशंकर गुप्ता-सदस्य/मजिस्ट्रेट
किशोर न्याय बोर्ड
सात साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा किया गया अपराध ही कानूनन क्षम्य है। ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि वर्दी में आरोपी बच्चों से पूछताछ नहीं की जा सकती अथवा उनको गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। अभी पिटाई के आरोपी बच्चों को लिखापढ़ी में गिरफ्तार भी नहीं किया गया है। इंस्पेक्टर ने उन्हें पकड़ा है, सभी को मेरे पास भी लाए थे।
प्रदीप गुप्ता-एसपी