घर से भागे देवर-भाभी को मासूम आशीष पर भी रहम नहीं आया। मोहब्बत को मुकाम नहीं मिला तो दुनिया से फना होने के लिए ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। अपनी मोहब्बत का अंत उन्होंने मासूम आशीष की कुर्बानी देकर की। वे चाहते तो आशीष की जानबख्श सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। लाशों के मिलने के बाद उनके इस आत्मघाती कदम पर जहां लोग गमजदा थे, वहीं गुस्से में भी थे।
यमुना किनारे स्थित भखंदा गांव के लोग रोज की तरह अपने-अपने कामों में रविवार को व्यस्त थे। इसी दौरान करीब दस बजे सूचना आई कि रमेश की पत्नी, बेटे व चचेरे भाई पंचू की लाश रेलवे ट्रैक पर मनौरी में मिली है। सूचना मिलते ही लोग अवाक रह गए। रमेश का कलेजा चाक हो गया। वह अपने परिजनों के साथ भागकर मौके पर पहुंचा। क्षत-विक्षत शवों को देख उसकी रूह कांप गई। परिवार के लोगों ने किसी तरह ढांढस बंधाया। संगीता व पंचू की मौत के बाद भी लोग उनके इस कदम से नाराज थे।
वजह यह कि उन्होंने खुद की जान तो दी निर्दोष आशीष को भी अपने साथ मौत की नींद सुला दिया। गम के साथ गुस्सा हर आंख में था। भखंदा से लेकर मनौरी रेलवे स्टेशन तक यही चर्चा लोग करते रहे कि आखिर आशीष का क्या कसूर था। यदि दोनों ने साथ जीने-मरने की कसम खाई थी तो उसमें आशीष को क्यों शामिल किया गया। देर शाम तक परिजन पोस्टमार्टम के बाद अंत्येष्टि कराने की तैयारी में थे। रमेश के पड़ोसी मोनू का कहना है कि घटना दुखद है। तीनों की तलाश कई जगह की गई थी लेकिन वे नहीं मिले। रविवार की सुबह लाश मिलने की जानकारी हुई। वहीं ग्राम प्रधान लल्लन का कहना है कि दोनों ने मासूम के साथ आत्महत्या की है। जीआरपी मामले की जांच कर रही है।