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पैतीस लाख का गबन पचा गए जिम्मेदार

Tue, 08 Aug 2017 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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कौशाम्बी
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जिले के खनन कार्यालय में तैनात रहे तत्कालीन लिपिक द्वारा ओवरलोड वाहनों को छोड़े जाते समय ट्रेजरी चालान में लगभग पैंतीस लाख रुपए का गबन किया गया। लिपिक के इस खेल का खुलासा होने के बाद तत्कालीन डीएम पर सपा के नुमाइंदों ने शिकंजा कस दिया। तब से अब तक चार डीएम बदल चुके पर आरोपी लिपिक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सका। जिले के जिम्मेदारों की हीलाहवाली के चलते न तो गोलमाल की रकम जमा कराई जा सकी और न ही लिपिक के खिलाफ शिकंजा कसा जा सका।
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वित्तीय वर्ष 11-12 में प्रभारी अधिकारी खनिज के रूप में तत्कालीन एडीएम की तैनाती थी। उनके कार्यकाल में बतौर खनिज लिपिक कलक्ट्रेट का एक बाबू कार्यरत था। इस दौरान जिले में बालू खनन और ओवरलोड वाहनों को पकड़े जाने का कारोबार चरम पर था। ओवर लोड में पकड़े जाने वाले इन वाहनों के पकड़े जाने पर खनिज विभाग और प्रभारी अधिकारी खनिज द्वारा जुर्माना किया जाता था। जुर्माने की धनराशि ट्रेजरी चालान के जरिए कोषागार में जमा कराया जाता था। खनिज लिपिक ने लगभग 154 वाहनों के ट्रेजरी चालान का पैसा तो वाहन स्वामियों से लिया पर कोषागार में धनराशि की ट्रेजरी की धनराशि जमा कराए बगैर खुद के आदेश से ही वाहनों को छोड़ दिया। चालान की धनराशि खुद के खाते में जमा कर मालामाल होता रहा। मामले की शिकायत वर्ष 2015 में डीएम राजमणि यादव से हुई तो उन्होंने गोलमाल की जांच एडीएम रामसूरत पांडेय को सौंपी।

एडीएम की जांच में लगभग 35 लाख रुपए के गोलमाल का खुलासा हुआ। डीएम ने मामले में कार्रवाई के लिए आरोप पत्र बनाने की जिम्मेदारी तत्कालीन एसडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह को सौंपी। आरोप पत्र न तैयार हो सके इसके लिए आरोपी लिपिक ने तत्कालीन सत्तापक्ष के एक नेता की शरण ली। चर्चा है कि नेता के दबाव में आकर एसडीएम ने 12 अक्तूबर को आरोपी लिपिक से जवाब तो मांगा लेकिन आरोप पत्र दाखिल नहीं किया। इसी बीच डीएम का स्थानांतरण हो जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तब से लेकर अब तक कलक्ट्रेट की कमान चार डीएम संभाल चुके पर लाखों के गोलमाल पर किसी की नजर नहीं गई।
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