सैनी के मौलवीपुर (उचरांवा) में सोमवार रात स्कूल प्रबंधक उमाशंकर (50) घर के भीतर ही जिंदा जल गया। घर के बाहर ही सो रही पत्नी को आग की लपटें उठने के बाद जानकारी हुई। कमरे को आग से घिरा दिखा तो पत्नी ने शोर मचाकर गांव वालों को इकट्ठा किया। काफी मशकक्त के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों का कहना है कि ढिबरी गिरने से हादसा हुआ है। हालांकि ग्रामीण घटना को संदिग्ध मान रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सैनी कोतवाली के मौलवीपुर (उचरांवा) गांव निवासी उमाशंकर (50) पुत्र चौबेलाल द्वारिका प्रसाद राजपूत उ0मा0 विद्यालय का प्रबंधक था। बड़ा बेटा अजय सात दिन से ससुराल में है। सोमवार की शाम छोटा बेटा आकाश पड़ोसी की बारात में शामिल होने गया था। घर पर पत्नी शांति देवी और मझला बेटा नीरज व उसकी पत्नी मौजूद थे। रात उमाशंकर परिवार के साथ खाना पीना करने के बाद कमरे में सोने चला गया। उमाशंकर जिस कमरे में सो रहे थे, उसका दरवाजा भीतर से बंद था, लेकिन खिड़की खुली थी। रात करीब तीन बजे संदिग्ध परिस्थितियों में कमरे में आग लग गई।
आग की लपटों से पूरा कमरा घर घिर गया तो बाहर सो रही पत्नी को इसकी जानकारी हुई। पत्नी के शोर मचाने पर तमाम लोग पहुंचे। गांव के लोग खिड़की के रास्ते से भीतर घुसे और दरवाजा खोला। जब तक आग बुझाई जाती, प्रबंधक जिंदा जल चुका था। आग इतनी भीषण थी कि शरीर कई जगह से अकड़ चुका था। सूचना पर सैनी कोतवाल राकेश चौरसिया फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों का कहना है कि ढिबरी गिरने से हादसा हुआ है। पुलिस और ग्रामीण परिजनों के दावे को हजम नहीं कर पा रहे हैं। इंस्पेक्टर राकेश चौरसिया का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। ग्रामीणों का कहना है कि घटना संदिग्ध है। यदि अपने से आग लगती तो प्रबंधक कहीं जान बचाकर भागने की कोशिश करता। घटनास्थल से ऐसा नहीं प्रतीत होता कि प्रबंधक ने जान बचाने की कोशिश की है।
नौकरी के लिए रुपये देने वालों ने प्रबंधक को फूंका!
घर के भीतर जिंदा जले स्कूल प्रबंधक उमाशंकर की पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है। फौरी जांच में पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां हासिल हुई हैं। स्कूल प्रबंधक ने अपने स्कूल को एडेड कराकर नौकरी देने के नाम पर दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की वसूली कर रखी थी। आशंका है कि नौकरी न मिलने पर किसी ने प्रबंधक को घर के भीतर ही मौत की नींद सुला दी है। जांच के दायरे में कई अन्य संदिग्ध लोग भी हैं। परिजनों से भी इस मामले में लगातार पूछताछ की जा रही है।
द्वारिका प्रसाद राजपूत उ0मा0 विद्यालय के प्रबंधक उमाशंकर की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल अपनेे पीछे छोड़े हैं। जिस कमरे में प्रबंधक सो रहा था, उसका दरवाजा अंदर से बंद था, जबकि खिड़की खुली थी। प्रबंधक चारपाई पर सो रहा था। आग लगने से प्रबंधक की केवल चारपाई व बिस्तर ही जला है। जबकि कमरे में उपली आदि भी रखा था, लेकिन आग वहां तक नहीं पहुंच सकी थी। घर के बाहर चार कदम की दूरी पर प्रबंधक की पत्नी शांति देवी सो रही थी। आग इतनी भीषण थी कि प्रबंधक की चारपाई पर ही जलने से मौत हो गई। शरीर अकड़ चुका था, लेकिन बाहर सो रही पत्नी को इसकी भनक तक नहीं लगी। आग की लपटों से कमरा घिर गया तो शोर मचाया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच की तो घटनास्थल की स्थिति संदिग्ध लगी।
पुलिस का यह मानना है कि यदि आग लगी होती तो प्रबंधक जान बचाने के लिए बिस्तर से जरूर भागता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिस्तर पर ही प्रबंधक जल गया। ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है। परिजनों का कहना है कि ढिबरी गिरने से आग लगी। यदि ढिबरी से ही आग लगी होती तो बिस्तर व प्रबंधक ही क्यों जला? इसका जवाब पुलिस खोजने में लगी है। गर्मी का दिन था, चद्दर ओढ़कर सोने वाला व्यक्ति इतनी भीषण आग में कैसे लेटे-लेटे जल गया, इसका जवाब परिजनों से ही पूछताछ में खंगाला जा रहा है। चर्चा है कि प्रबंधक के अत्यधिक नशे में सोने के कारण ऐसा हुआ है लेकिन घटना का समय इस दावे को नकार रहा है। रात करीब तीन बजे की वारदात है। ऐसे में इतनी रात को अत्यधिक नशे में ऐसी घटना होने की संभावना से पुलिस खुद इंकार कर रही है। जांच के दौरान ही पुलिस को पता चला कि प्रबंधक ने अपने स्कूल को एडेड कराने का दावा कर कई लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूल रखी थी। इसमें जौनपुर के भी लोग शामिल हैं। आशंका है कि कहीं नौकरी न मिलने पर किसी व्यक्ति ने तो यह घटना अंजाम नहीं दी।