मूरतगंज पुलिस के गुनाह ऐसे हैं कि कोई भी कुर्सी पर उन्हें बैठे देखना नहीं पसंद कर सकता। एसपी वीके मिश्र यह नजारा जरूर देख रहे हैं। छेड़खानी के आरोपी को छोड़ने के मामले में वह एकदम से चुप्पी साधकर बैठ गए हैं। यह वही एसपी हैं, जिन्हाेंने लाश फेंकने के मामले में सीओ सिराथू के कहने पर ही सैनी कोतवाली पुलिस पर गाज गिरा दी थी। इस मामले में वह कार्रवाई के नाम पर क्यों आनाकानी कर रहे हैं, यह उनके मातहत अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे हैं। रही बात सीओ की तो वह इस मामले में जांच के नाम पर चुनाव ड्यूटी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
कोखराज इलाके के इमामगंज के एक ईंट-भट्ठा के समीप बुधवार की दोपहर निर्वस्त्र महिला की लाश मिली थी। महिला की खुरपे से गर्दन काटी गई थी। एसपी वीके मिश्र व एएसपी आशुतोश मिश्र मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने गैंगरेप की आशंका जताते हुए महिला की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मृतका के परिजनों का आरोप था कि मूरतगंज चौकी पुलिस ने हत्यारोपी को रविवार की छेड़खानी के बाद छोड़ दिया था। परिजनों का इल्जाम यह है कि यदि पुलिस आरोपी प्रेम साहू को न छोड़ती तो यह घटना न होती। यह आरोप लाश बरामद होने के बाद परिजनों ने पुलिस अफसरों के सामने लगाए थे। इतना ही नहीं चौकी प्रभारी राकेश शर्मा व सिपाहियों की इशारा करके उन पर आरोपी की मदद करने का भी दोष मढ़ा गया था। इतना सब कुछ होने के बाद एसपी वीके मिश्र ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की। कार्रवाई के नाम पर प्रारंभिक जांच सीओ सिराथू से कराई जा रही है। दूसरी ओर जांच मिलने के बाद से अब तक सीओ सिराथू ने इस मामले में परिजनों से कोई बातचीत नहीं की। उनका यही कहना है कि वह चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं।
हमें भी हैं जांच रिपोर्ट का इंतजार
डीएम अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि कोखराज इलाके में हुई सनसनीखेज वारदात के बाद मूरतगंज पुलिस चौकी पर जो आरोप लगे हैं, उसका हमें बेसब्री से इंतजार है। इस मामले में हमनें एसपी से रिपोर्ट मांगी है। अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। डीएम का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है। पुलिस पर इस तरह के आरोप नहीं लगने चाहिए। सच्चाई क्या है? इसका पता जांच रिपोर्ट से ही पता चलेगा। इस जांच रिपोर्ट का हम इंतजार कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट जैसे ही मिलती है, हम उसका परीक्षण करने के बाद तत्काल कार्रवाई कराएंगे।
बिकते रहे हैं कौशाम्बी के थाने
जनपद में कुल 12 थाने हैं। थानेदारों की तैनाती के लिए कभी यहां बोली भी लगती थी तो कभी नेताओं के इशारे पर थानेदार तैनात हुए हैं। हालात ऐसे पैदा हुए कि इन पर नजर टेढ़ी करने पर एसपी तक को खामियाजा भुगतना पड़ा। एक नहीं कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनको याद कर लोग यही कहते हैं कि आखिर जिला चलाता कौन है। खरीदार या नेता।
एसपी सत्यार्थ अनिरूद्ध पंकज बड़े तेज तर्रार एसपी थे। आते ही उन्होंने हाईवे के उन दरोगाओं को किनारे किया, जिनकी सत्ता तक पहुंच थी। कोखराज एसओ विनोद यादव या सैनी के दिनेश यादव। इनको उन्होंने मामूली चूक होने पर तनिक भी मोहलत नहीं दी थी। अपने नाम का सिक्का चलाने वाले प्रदीप यादव कोखराज में उन्हीं के कार्यकाल में तैनात हुए थे। एक आरोपी की हवालात में मौत होते ही उन्होंने उनको हटा दिया था। महकमे के भीतर की बात है कि एक एसओ ने उनको खुली चेतावनी दी थी कि वह उनको इस जनपद में नहीं रहने देगा और कोखराज थाने की कमान वापस लेगा। हुआ यही। इसके बाद एसपी केएजिल रसन आए। इनके कार्यकाल भी थानेदारों की तैनाती को लेकर दरोगाओं के बीच खूब टशन चली।
हाईवे के थानों को लेकर तमाम तरह की कवायद हुई, लेकिन दाल किसी की नहीं गलने पाई। यहां की एक तेज तर्रार दरोगा की एसपी से ठन गई। परिणाम एसपी का ही तबादला हुआ। इसके बाद आए एसपी वीके मिश्र। इनके कार्यकाल में भी थानों में तैनाती को लेकर बड़ी महाभारत हुई। सैनी से दिनेश यादव को हटाकर उन्होंने करारी थाना भेजा तो वह मेडिकल चले गए। बहुत कम ही उन्होंने करारी थाने में समय बिताया। इसके बाद कोखराज एसओ विनोद यादव को सरायअकिल भेजा गया। आज तक उन्होंने सरायअकिल थाने का चार्ज नहीं लिया। बाद में उनको पीआरओ बनाया गया। इसके बाद भी वह नदारद है। यह है कि पुलिस महकमे की व्यवस्था। इन सब हालातों को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर कैसे लोगाें को इंसाफ मिलेगा।