मंझनपुर। जिले के गांजा तस्कर खाकी पर भारी पड़ रहे है। मौत के सौदागर रोजाना मादर्क पदार्थ की खेप ठिकानों पर उतार रहे है। अफसरों की हिदायत और चेतावनी के बाद भी जिम्मेदारों के कानों में जूं नहीं रेंग रही है। प्रति माह 50 से 60 कुंतल गांजे की जिले में खपत हो रही है। भांग की दुकानों पर गांजे की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। मोटी रकम बंधी होने के कारण जिम्मेदार भी खामोशी अख्तियार किए हैं।
दोआबा की 17 लाख आबादी में भांग की 46 दुकानें संचालित की जा रही हैं। इन दुकानों पर भांग के साथ गांजे की धड़ल्ले से बिक्री की जाती है। दुकानों में गांजा कहां से आता है और इसका सौदागर कौन है? इस बाबत पुलिस अफसरों के साथ आबकारी विभाग के जिम्मेदार खामोश बने हैं। अफसरों की चेतावनी के बाद भी जिले में मादक पदार्थ की तस्करी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जिले में 50 से 60 कुंतल गांजे की खपत हो रही है। कुछ लाइसेंसी भांग की दुकान भी इस धंधे में लिप्त हैं। युवा वर्ग भांग की जगह गांजे का नशा कर रहा है। कुछ दिन पहले आईजी जोन ने पुलिस अधीक्षक को मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को चिन्हित करने का निर्देश दिया था। एसपी ने जिम्मेदारों को चेताया था कि यदि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री हुई तो बख्शा नहीं जाएगा। मगर
खाकी की सूची से गायब हुए तस्कर
मंझनपुर (ब्यूरो)। पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश के बाद जिले की पुलिस ने कुछ नामी गिरामी गांजा तस्करों को सूचीबद्ध किया था। इसके बाद भी इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह चर्चा का विषय बना है।
हाइवे के ढाबे बने तस्करों के अड्डे
मंझनपुर (ब्यूरो)। हाइवे पर संचालित कुछ ढाबों पर मादक पदार्थों की खेप उतारी जाती है। इसके बाद तस्कर उसे लक्जरी गाड़ियों में लादकर ठिकाने तक पहुंचा देते हैं। बताया जा रहा है रात 12 बजे के बाद ट्रकों से गांजे की खेप हाइवे पर उतरती है।
पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने के निर्देश सभी थानेदारों को दिए गए हैं। जिला आबकारी अधिकारी एसपी पांडेय का कहना है कि जिले में एक भी दुकान फर्जी नहीं है। एक दो दुकानें अभी ट्रांसफ र हुई हैं। यदि भांग की दुकानों पर गांजे की बिक्री की जा रही है तो अभियान चलाकर कार्रवाई कराई जाएगी।