मंझनपुर। बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अफसरों की मनमानी का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। समय से पोषाहार नहीं मिलने के कारण म्योहर और तैयबपुर मंगौरा गांव में 221 बच्चे कुपोषित हैं। इसमें 23 बच्चे अति कुपोषित हैं। उनकी हालत भी नाजुक है। अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की यह मनमानी उपजिलाधिकारी मंझनपुर के जांच में सामने आई। एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है। डीएम ने सीएमओ और डीपीओ को बच्चों के इलाज और पुष्टाहार के इंतजाम कराने का निर्देश दिया है। चेताया है कि मनमानी पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उपजिलाधिकारी मंझनपुर नरेन्द्र बहादुर सिंह 28 जनवरी 2015 को विकास खंड मंझनपुर के तैयबपुर मंगौरा गांव का निरीक्षण किया था। एसडीएम ने गांव में चल रहे सभी 4 आंगनबाड़ी केंन्द्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। अभिलेखों की जांच की। इसके बाद घर-घर सर्वे करके बच्चों का वजन कराया। एसडीएम ने सभी 4 केन्द्रों के अन्तर्गत 221 बच्चे कुपोषित मिले हैं। इसमें 23 बच्चे अति कुपोषित हैं। इनकी हालत भी नाजुक है। एसडीएम ने बताया कि मनोरमा देवी के केंद्र पर 178 बच्चे पंजीकृत हैं।
इसमें 78 बच्चे कुपोषित और 3 बच्चे अति कुपोषित हैं। वहीं हेमा देवी के केंद्र पर 165 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें और 37 बच्चे कुपोषित और 3 बच्चे अति कुपोषित हैं। इसी तरह संगीता कुशवाहा के केन्द्र पर 92 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 37 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं प्रेमा देवी के केंद्र पर 175 पंजीकृत हैं। इसमें 69 बच्चे कुपोषित हैं। एसडीएम ने बताया कि म्योहर में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 854 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 17 बच्चे अति कुपोषित हैं। एसडीएम ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को कार्यकर्ताओं से समय पोषाहार का वितरण नहीं किया जाता है। इससे बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
वहीं केन्द्रों में सूचनाओं का अंकन रजिस्टर में नहीं किया जाता है। मनमानी पर विफरे एसडीएम ने कार्यकर्ताओं की जमकर क्लास ली।वहीं अपनी जांच रिपोर्ट कार्रवाई की संस्तुति के साथ जिलाधिकारी को भेज दी है। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ राजकुमार मिश्रा को बच्चों के इलाज और जिला कार्यक्रम अधिकारी को पुष्टाहार का इंतजाम करने का निर्देश दिया है। मनमानी पर उन्होंने कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।