जीत का पुरवा में सोमवार की रात घर के बाहर इंद्रपाल यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चरवा थाने की पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो वह बेटों व भतीजे के बीच उलझकर रह गई। इंद्रपाल अपने भतीजे के साथ रहता था, इससे उसके बेटे नाराज रहते थे। अब पुलिस को यह तय करना है कि घटना किसने अंजाम दी। भतीजे ने भी साफ कर दिया है कि आपस में सबको लड़ाने के लिए किसी तीसरे ने यह खेल खेला है।
जीत का पुरवा निवासी इंद्रपाल (60) के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा सोहनलाल गांव में रहता है, जबकि छोटा बेटा मोहनलाल दिल्ली में रहकर एक कंपनी के लिए काम करता है। पत्नी की मौत के बाद से इंद्रपाल बेटों से अनबन होने के कारण अपने छोटे भाई के बेटे अशोक के साथ उसके घर में रहता था। अशोक अपने दादा की देखभाल करता था। इसी बात को लेकर सोहनलाल उससे नाराज रहता था। सोमवार की रात इंद्रपाल अशोक के घर के बाहर सो रहा था। रात करीब दस बजे इंद्रपाल की कनपटी व पेट में गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद हत्यारे भाग निकले। फायरिंग की आवाज सुनकर अशोक घर से बाहर निकला। इसके बाद शोर सुनकर 50 मीटर दूर घर में सो रहा सोहनलाल भी वहां पहुंचा।
सूचना चरवा थाने की पुलिस को दी गई। देर रात तक एएसपी वीरेंद्र कुमार, सीओ रामभवन यादव और एसओ रामआसरे सरोज मौके पर पहुंचे। अशोक व सोहनलाल से पूछताछ के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इंद्रपाल के पास करीब तीन बीघा संपत्ति है। पुलिस को आशंका है कि कहीं इस संपत्ति के लिए तो हत्या नहीं हुई। सोहन ने पुलिस को बताया है कि दो लोगों ने हत्या की है और वह भाग निकले हैं। अशोक कुछ बता नहीं पा रहा है। अशोक का कहना है कि उनको आपस में लड़ाने के लिए किसी तीसरे ने यह वारदात अंजाम दी है। हकीकत क्या है पुलिस इसको खंगालने में जुटी है।
क्यों नहीं आए ग्रामीण
इंद्रपाल की हत्या के बाद देर रात चरवा थाने की पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची तो पूछताछ के लिए ग्रामीणों को बुलाया। पुलिस के तमाम प्रयास के बाद भी गांव के लोग मौके पर नहीं आए। इससे पुलिस भी हैरान थी। हत्या की वारदात के बाद भी ग्रामीण क्यों मौके पर नहीं आए, इसके कारणों को भी पुलिस खंगाल रही है।