सहेलियों के साथ सोमवार की सुबह यमुना नदी में नहाने गई महेवाघाट गांव की मासूम बालिका नदी में समा गई। जबकि छोटी बहन समेत सहेलियों को शोर मचाने पर बचा लिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद शव पोस्टमार्टम भेजने का प्रयास किया पर परिजनों ने इंकार कर दिया। देर शाम घर वालों ने मासूम बच्ची के शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
महेवाघाट गांव निवासी विजय कुमार मजदूर है। सोमवार की सुबह उसकी बेटी लक्ष्मी देवी (12), दीक्षा (09) मोहल्ले की मोनू देवी (13) पुत्री बाबूलाल, सुमन देवी (12) पुत्री शिव प्रसाद के साथ गांव के सामने स्थित यमुना नदी में नहाने गई थी। बताया जा रहा है कि घाट पर पहुंचने के बाद सभी एक साथ नदी में नहाने के लिए कूद गई। थोड़ी दूर जाने के बाद सभी गहरे पानी में चली गई। लक्ष्मी ने शोर मचाया तो आसपास मौजूद गांव के लोग भागकर पहुंच गए। गांव के ही गोताखोर लक्ष्मीकांत को बुलाया गया। डूब रही बच्चियों को बचाने के लिए वह यमुना में कूदा।
इस दौरान उसने एक-एक करके मोनू, सुमन और दीक्षा को तो बचा लिया पर, लक्ष्मी नदी में समा चुकी थी। जब तक वह उसे खोजकर बाहर निकालता लक्ष्मी की सांसे थम चुकी थी। लक्ष्मी को परिजन अस्पताल लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहा पर परिजनों ने इंकार कर दिया।
किशोर के जांबाजी को सलाम
महेवा यमुना घाट पर सोमवार की सुबह लक्ष्मीकांत ने मोनू, सुमन और दीक्षा को अपनी जान पर खेलकर नदी से बाहर निकाला था। तीन बच्चियों की जान बचाने पर लोग उसकी सराहना कर रहे हैं। वहीं लक्ष्मीकांत को इस बात का दुख है कि यदि वह मौके पर होता तो वह लक्ष्मी की भी जान बचा लेता है।