जिले में राशन माफिया की हनक के आगे अफसर नतमस्तक हैं। राशन माफिया ने जिले के गोदामों पर कब्जा जमा रखा है। गोदामों से राशन की उठान करने के बजाए उसे कोटेदार माफिया के हाथों बेच देते हैं। इसकी जानकारी अफसरों को है।
कोटेदारों के खिलाफ रोज होने वाले धरना प्रदर्शन राशन की कालाबाजारी का सीधा प्रमाण है, पर अफसर कुछ नहीं कर रहे हैं। हक गरीबों का मारा जा रहा है। राशन माफिया मालामाल हो रहे हैं। जाहिर है कि गोदामों की जांच नहीं होने से वहां सक्रिय राशन माफिया बड़ा हिस्सा अफसरों तक भी पहुंचा रहे हैं। और शायद इसी का नतीजा है कि अफसर कोई भी कार्रवाई करने से बचते रहते हैं।
कोटे से कार्ड पर राशन लेने वाले गरीब चकर घिन्नी बनकर रह गए हैं। इन गरीबों को कार्ड में दर्ज यूनिट के हिसाब से राशन नहीं मिलता है। इसका जीता जागता प्रमाण है कि कलक्ट्रेट में आए दिन कोटेदार के खिलाफ धरना प्रदर्शन होता है। कोटेदारों पर घटतौली से लेकर राशन नहीं दिए जाने का आरोप लगता है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कोटेदार के खिलाफ शिकायत क्यों होती है। जाहिर है कि कोटेदार राशन बेच देते हैं।
माफिया राशन खरीद लेते हैं। ऐसे में जब कोटे पर राशन रहता ही नहीं है तो कोटेदार गरीब कार्ड धारकों को राशन कहां से दे। जबकि कोटेदार के खिलाफ धरना प्रदर्शन होने पर अफसर गरीबों को जांच का आश्वासन दे देते हैं। मगर तह तक नहीं जाते हैं। अगर अफसर चाह लें तो राशन की कालाबाजारी बंद हो जाए। गरीबों को कार्ड पर दर्ज यूनिट के हिसाब से राशन मिलने लगे और धरना प्रदर्शन बंद हो जाए।
जिले में हर ब्लॉक में राशन उठान के लिए गोदाम बने हैं। मगर हैरत है कि जिला मुख्यालय में डीएम कार्यालय से चंद कदम दूर स्थित मंझनपुर गोदाम में भी राशन माफिया हावी हैं। सूत्रों की मानें तो 28 जून तक इस गोदाम से संबद्ध 70 में से केवल 27 कोटेदार ने राशन की उठान की थी। जबकि 29 जून को उठान करने वाले कोटेदारों की संख्या 50 पहुंच गई। यानि एक दिन में 23 कोटेदार ने राशन का उठान किया। सूत्रों की मानें तो अगर अफसर केवल मंझनपुर गोदाम की तहकीकात कर लें तो बड़े पैमाने पर राशन की होने वाली कालाबाजारी पकड़ में आ जाए।