कोहरे का शिकार हुए संजय के घर में हाहाकार मचा हुआ है। मां-बाप रो रहे हैं। नात-रिश्तेदार भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। संजय की मौत से एक नहीं बल्कि तीन घरों में मंगल गीत की जगह चीखें गूंज रही हैं। सबसे बुरा हाल सावित्री का है। वह भाई के गम में बेसुध हो जा रही है।
संजय प्रजापति की शादी बेला फतेहपुर में होनी थी। बुधवार को उसका तिलक चढ़ना था। उसकी बहन सावित्री की बुधवार की शाम ऊंचवा नसीरपुर से बारात आनी थी। सावित्री की शादी राकेश कुमार से तय हुई थी। बुधवार भोर में हादसे में संजय की मौत हो गई। जैसे ही यह खबर पुलिस ने परिजनों को दी तो उनका कलेजा मुंह को आ गया। बहन बेसुध हो गई। छोटा भाई बिलबिला कर रो पड़ा। मां-बाप के होंठ सूख गए। घर के सारे कामधाम बंद हो गए।
एकदम से घर में सन्नाटा। खाना बनाने वाले ने भट्ठी बुझा दी, टेंट वाले ने अपना काम रोक दिया। घर में मातम शुरू हो गया तो मोहल्ले वालों ने अपने चूल्हे ठंडे कर लिए। संजय की मौत की खबर उसकी बहन की ससुराल पहुंची तो वहां भी मायूसी छा गई। संजय की ससुराल का बुरा हाल रहा। संजय की शादी ममता से होनी थी। ममता के घर वाले भी भागकर रसूलपुर पहुंचे। घर वालों को देखकर वह भी अपने को रोक नहीं सके और लिपटकर रोने लगे। देर शाम तक संजय के घर से रोने-चीखने की आवाजें आती रहीं।