गांजा तस्करों की नोट की गड्डियों के आगे आबकारी टीम ने घुटने टेक दिए हैं। भांग की दुकानों से लेकर पान की गुमटियों तक में गांजा खुलेआम बेंचा जा रहा है। विभागीय टीम है कि वह कारोबारियों के खिलाफ छापेमारी करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही है। यही कारण है कि गैर प्रांतों से गांजे की खेप दोआबा में बेखौफ आ रही है। युवा इस नशे में पड़कर बर्बाद हो रहा है और अफसरों को अपनी जेब भरने की लगी हुई है। हर महीने करोड़ों का गांजा जिले में खप रहा है।
दोआबा में गांजे का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। भांग की दुकान हो या फिर पान की गुमटी हर जगह गांजे की पुड़िया आसानी से उपलब्ध है। गांव-गांव गांजा बिक रहा है। तस्करों के हाथ इतने लंबे हैं कि कोई भी इनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर छापेमारी की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। एक कारोबारी तो इतना निडर है कि वह आबकारी कार्यालय में आए दिन डेरा डाले रहता है। इसके चलते तस्करी से गैर प्रांतों से गांजे की खेप महीने में कई बार जिले की भांग की दुकानों में भेजी जाती है।
इन दुकानों के ठेकेदार गांजा आने के बाद ग्रामीण इलाकों में गुर्गों के जरिए गांजा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। यही कारण है कि भांग की दुकान से लेकर पान गुमटियों तक में गांजे की पुड़िया जगह-जगह आसानी से उपलब्ध है। इनकी पकड़ और सत्ता में असर के चलते आबकारी टीम ने पूरी तरह से घुटने टेक दिया है। फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि आबकारी अधिकारी और उनकी टीम भांग की दुकानों में गांजे की बिक्री पर अंकुश लगा सकेगी। फिलहाल, जिला आबकारी अधिकारी भंाग की दुकानों में धड़ल्ले से बिक रहे गांजे को लेकर मौन हो गए हैं।
तस्करों और भांग की दुकानों में गांजा बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एसओजी और थानों की पुलिस को वसूली की आदत छोड़नी होगी। सूत्रों का कहना है कि जब एसओजी के सिपाही और संबंधित थाने की पुलिस गांजा तस्करों और भांग के दुकानदारों से मोटी रकम लेती रहेगी तब तक न तो गैर प्रांतों से आने वाली गांजे की खेप रोकी जा सकेगी और न ही भांग की दुकानों में गांजा बिक्री पर रोक लग पाएगी। ऐसा हो इसके लिए जिले के जिम्मेदारों को कमान थामनी होगी।
गैर प्रांतों से दोआबा में गांजे की खेप आने के बाद सरगना दो-तीन दिन तक शांति अख्तियार कर लेता है। इसके बाद भांग की दुकानों में जरूरत के मुताबिक गांजे की खेप पहुंचाई जाती है। दुकानों के अलावा गांव स्तर पर इस अवैध कारेाबार को करने वालों के पास बाइक और कार के जरिए भोर में मांग के मुताबिक गांजा पहुंचाया जाता है।
लगभग साल भर पहले डीएम राजमणि यादव ने भांग की दुकानों पर गांजा बिक्री को पूर्ण प्रतिबंधित करने का फरमान जारी कर दिया था। उन्होंने एसपी को अल्टीमेटम दिया कि किसी भी थानाक्षेत्र में भांग की दुकान से गांजा नहीं बिकना चाहिए। डीएम के निर्देश पर हरकत में पुलिस आई तो तत्कालीन डीओ गिड़गिड़ाने लगे थे। उन्होंने डीएम को राजस्व हानि का हवाला दिया तो एसपी से रहम करने की बात कही। बताया कि भांग की बिक्री से मिलने वाले राजस्व की पूर्ति नहीं हो सकती। ऐसे में खुले में न सही चोरी-छिपे गांजा बिकने दिया जाए। डीओ की पैरवी पर तत्कालीन डीएम और एसपी ढीले पड़ गए थे। उनके जाने के बाद एक बार फिर कारोबार चरम पर पहुंच गया है।
हिम्मत नहीं जुटा पाए आबकारी अधिकारी
जिला आबकारी अधिकारी बीपी मानिक शनिवार को भी गांजा कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाए। शुक्रवार को आबकारी अधिकारी ने अपनी गाड़ी खराब होने का हवाला देते हुए छापेमारी में दिक्कत बताई थी। जबकि इस मसले पर शनिवार को उन्होंने क्या कार्रवाई की। इसे जानने के लिए जब उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया तो मोबाइल कॉल रीसिव नहीं हुई। ऐसे में माना जा रहा है कि गांजा तस्करों के दबाव से आबकारी अधिकारी उबर नहीं पा रहे हैं।