मंझनपुर। जहरीली शराब पीने से कौशाम्बी के चार मजदूरों की मौत हो गई। कानपुर में मजदूरी करने वाले इन गरीब मजदूरों ने मौत का यह सामान वहीं कहीं से खरीदा था। अभी महीनेभर पहले ही जहरीली शराब से मौत का ऐसा ही तांडव राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में भी देखने को मिला था, जहां चार दर्जन लोग काल के गाल में समा गए थे। फिर भी आबकारी और पुलिस के अफसर जहरीली शराब बनाकर बेचने वालों धंधेबाजों पर नकेल नहीं डाल सके हैं। जिसके कारण ही बुधवार की रात कौशाम्बी के बिदनपुर आमद करारी गांव में यह घटना हुई।
बता दें कि राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद, उन्नाव में जहरीली शराब पीने से 12 जनवरी को चार दर्जन लोगों की मौत हुई थी। इस घटना को हुई महीनाभर भी नहीं बीता, इससे पहले ही कानपुर की जहरीली शराब ने कौशाम्बी के बिदनपुर आमद करारी गांव के अमरनाथ, श्रीपति, महेंद्र कुमार और विशेषर की जान ले ली। घटना से एक बार फिर पूरा प्रदेश हिल गया है। घटना के बाद बिदनपुर गांव में हजारों की भीड़ जमा हो गई।
सभी की जुबान पर सिर्फ एक ही टीस और गुस्सा था कि क्या मलिहाबाद की घटना का कोई असर मौत के सौदागरों पर नहीं पड़ा है। क्या सूबे की पुलिस और आबकारी के अफसर जहरीली शराब बनाकर बेचने वालों पर नकेल नहीं कस पाएगी। लोगों का मानना है कि यदि उस घटना के बाद ईमानदारी से आबकारी और पुलिस ने जहरीली शराब बनाने वालों पर शिकंजा कसा होता, तो कानपुर में शराब पीने वाले कौशाम्बी के ये चार मजदूर शायद आज जिंदा होते। फिलहाल एक साथ चार लोगों की शराब पीने से हुई मौत के बाद एक बार फिर अफसर सक्रिय हो गए हैं।
कौशाम्बी में भी गांव-गांव धधकती हैं भट्ठियां
जिस जहरीली शराब ने कौशाम्बी के चार मजदूरों की जान ले ली। वैसी ही जहरीली शराब को बनाने का कारोबार कौशाम्बी में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसकी बानगी मलिहाबाद कांड के बाद चले अभियान के दौरान देखने को मिली थी। 15 दिनों तक पुलिस, आबकारी और राजस्व अफसरों की टीम ने गांव-गांव शराब बनाने वाले धंधेबाजों की धरपकड़ के लिए जिले में अभियान चलाया था। पुलिस आंकड़ों पर ही गौर करें तो तब पुलिस 600 घरों में दबिश दी थी। जहां शराब बनते हुए मिली थी।
मौके से पुलिस ने 1200 लीटर महुआ की शराब, 100 लीटर स्प्रिट, 300 कुंतल लहन बरामद करते हुए 50 से अधिक शराब की भट्ठियां नष्ट की थी। इतना ही नहीं पुलिस ने 150 धंधेबाजों को गिरफ्तार करके जेल भी भेजा था। साथ ही अफसरों की टीम ने अभियान के दौरान अजुहा, केवटपुरवा, लोधन का पुरवा और नंदा का पुरवा गांव को देशी जहरीली शराब बनाने के मामले में अतिसंवेदनशील और खरका, तिलगोड़ी, चायल, लहना, फैजीपुर, ओसा, गढ़वा समेत दो दर्जन गांवों को संवेदशील भी चिन्हित किया है।
कोखराज कोतवाली क्षेत्र के जिस बिदनपुर गांव के चार मजदूर जहरीली शराब पीकर दुनिया से असमय विदा हो गए। उस बिदनपुर में भी अवैध तरीके से शराब बनाई जाती है। इसके अलावा कोखराज इलाके के ही देवभिटा, मोहनपुर, बिसारा, रामपुरवा, भदवां, बालकमऊ, खारा, सांई का पुरवा, टीकरडीह, करेंटी, मलाक भयाल, चाकवन, राला, बाजापुर, महेशपुर, कसिया, बम्हरौली, शहजादपुर, परसखी, काकराबाद, चकचमरूपुर और चमंधा गांवों में भी कच्ची शराब की भट्ठियां रोजाना धधकती रहती हैं। पुलिस ने कई बार इन गांवों में दबिश देकर शराब के साथ कारोबारियों की धरपकड़ और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की। इसके बाद भी इलाके और कौशाम्बी जिले में यह काला कारोबार बंद नहीं हो सका है।
कच्ची शराब बनाकर बेचने वाले कारोबारी पियक्कड़ों की सेहत दांव पर लगाने में तनिक भी परहेज नहीं करते हैं। कम कीमत पर ज्यादा नशा देने के लिए महुआ के साथ स्प्रिट, थिनर, यूरिया, आक्सीटोसिन इंजेक्शन, नींद की गोली समेत तमाम तरह के अन्य रसायन भी मिलाकर शराब तैयार करते हैं। नशे के चक्कर में शराब पीने वाले लोगों की कभी-कभार मौत भी हो जाती है अथवा वे कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
कौशाम्बी में बनने और बिकने वाली देशी दारू अब तक कई लोगों की जान ले चुकी है। आठ अगस्त 2012 को ही कोखराज कोतवाली क्षेत्र के करेंहटी गांव के रोशनलाल और भुइयादीन की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है। वहीं वर्ष 2007 में कोखराज कोतवाली क्षेत्र मलाक भयाल गांव में भी शराब पीने से एक युवक की जान चली गई थी। अक्सर होने वाली इन जानलेवा घटनाओं के बाद भी जिले में इस काले कारोबार को पुलिस और आबकारी विभाग बंद नहीं करा पा रहा है।
कोखराज कोतवाली के बिदनपुर आमद करारी गांव के अमरनाथ, श्रीपति, महेंद्र कुमार और विशेषर की जान मांस-मदिरा के शौक ने ले ली। बताया जा रहा है कि ये चारों मजदूर मांसाहारी खाने के साथ पीने के भी शौकीन थे। इनके साथी मजदूर ही बताते हैं कि आए दिन ये गोश्त खाते और इस दौरान एक साथ बैठकर दारू भी पीते थे। पर, इससे पहले कभी इन मजदूरों की शराब पीने से तबीयत नहीं बिगड़ी थी।