अवैध खनन से यमुना की छाती छलनी हो गई है। रोज करीब पांच सौ ट्रक बालू निकाली जाती थी। आधा दर्जन घाटों पर पोकलैंड और जेसीबी लगी हुई थीं। यमुना में लगातार अवैध खनन से राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा था। मगर सब चुप थे। शायद ये आवाज डीएम अखंड प्रताप सिंह ने सुनी। नतीजा सालों बाद यमुना की घाटी में बालू माफिया की आवाजाही खामोश हुई। ट्रकों का आना-जाना बंद हुआ। मशीनों की थर्राहट बंद हुई। अब अमर उजाला ‘दरिया मांगे इंसाफ’ सीरीज शुरू कर रहा है। जिससे आप जान सकेंगे कि आखिर यमुना की घाटी में क्या होता है। कैसे चलता है लाल सोने का काला कारोबार। कौन करता है। कहां से जुड़े हैं इस काले कारोबार के तार। बेहिसाब हो चुका है नुकसान। कैसे होगी होगी भरपाई। कितनी झेलनी होगी तबाही।
डीएम की धरपकड़ के बाद ये तो साबित हो गया है कि यमुना के घाटों से बालू का अवैध खनन होता है। मंझनपुर कोतवाली के सामने खड़े बालू लदे 28 ट्रक इस बात के गवाह हैं कि बालू निकाली जाती है तभी ढोई जाती है। ऐसे में अब डीएम क्या कदम उठाएंगे, इस पर पूरे जिले के लोगों की नजर है। लाल सोने के काले कारोबार पर विराम लग चुका है। ऐेसे में बालू माफिया पूरी सरकारी कार्रवाई को रोकवाने पर आमादा हैं। बालू का धंधा फिर चमकेगा कि नहीं इसे लेकर बालू माफिया में सरगर्मी बनी हुई है। सारे बालू माफिया धंधे को शुरू कराने के लिए गुपचुप रणनीति बनाने में लगे हैं।
अमर उजाला ने ओवर लोडिंग पर खबर प्रकाशित की तो अवैध खनन के सारे तार जुड़ गए।
आखिरकार जिला प्रशासन की नाक बचाने के लिए रविवार रात डीएम को सड़क पर उतरना पड़ा। 28 ट्रक पकड़ लिए गए। सब पर बालू लदी थी। मंझनपुर कोतवाली के सामने बालू लदे ट्रकों की कतार लग गई। सोमवार रात डीएम एसपी को लेकर फिर निकले। हालांकि इस बार यमुना घाटों पर बालू का अवैध खनन बंद मिला। ऐसे में बालू माफिया बिलबिला गए हैं। रोज का उनका करोड़ों का कारोबार बंद हो चुका है। सूत्रों की मानें तो बालू माफिया एकजुट हो रहे हैं। वे कार्रवाई को लेकर दबाव बनाने की जुगत में लग गए हैं। उनकी कवायद है कि लाल सोने का काला कारोबार एक बार फिर शुरू हो। हालांकि डीएम की सख्ती का असर रहा कि कई वर्षों बाद तीन रोज से यमुना के घाटी से लाल सोना नहीं निकल पा रहा है। लाल सोने से मालामाल होने वाले छटपटा गए हैं।
फतेहपुर से लगी कौशाम्बी की सीमा के महेवाघाट से शुरू होने वाला अवैध खनन इलाहाबाद के सेंउढ़ा घाट तक चलता है। दोनों घाटों के बीच यमुना के किनारे करीब 60 किलोमीटर तक घाटों पर बालू निकाली जाती है। करोड़ों का कारोबार होता है। घाटों पर बालू निकालने वाले लोग ‘महराज’ के नाम से जाने जाते हैं। इन महराजों को सुरक्षा के नाम पर लाखों खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में लाखों रुपये ले जाने वाले कितने ताकतवर हैं इसे आसानी से समझा जा सकता है।
मंझनपुर कोतवाली के बाहर खड़े बालू लदी ट्रकों को छुड़ाने के लिए तीसरे दिन यानी बुधवार को दिनभर माथापच्ची चलती रही। ट्रक मालिक और चालक अपने आकाओं को फोन लगाते रहे, मगर कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला। खनिज कार्यालय से लेकर मंझनपुर कोतवाली तक दिनभर भागदौड़ होती रही।
डीएम की कार्रवाई ने बालू के अवैध खनन के धंधेबाजों की कमर तोड़ दी है। अवैध खनन के इतिहास में शायद पहली बार किसी डीएम ने इतनी बड़ी कार्रवाई की है। 28 ट्रकों के तीन दिन से कोतवाली में खड़े होने से इस काले कारोबार से जुड़े लोगों कि घिघ्घी बंध गई है। अब तक ट्रक मालिकों को कार्रवाई से बचाने का दावा करने वालों के होंठ खामोश हैं।