जिला कारागार में निरूद्ध बंदियों की बगावत बढ़ती जा रही है। बंदी रक्षकों की वसूली और पिटाई से खफा बंदियों ने अनशन शुरू कर रखा है। सुलह समझौते का प्रयास नाकाम होने पर जेल प्रशासन ने बंदियों की परिजनों से मुलाकात पर पाबंदी लगा दी है। मिलने आए परिजनों को बहाना बनाकर वापस कर दिया जाता है। जिला प्रशासन की इस तानाशाही से खफा बंदियों के परिजनों ने रविवार को डीजीपी जेल का प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
कौशाम्बी का जिला कारागार बनने के बाद से ही हमेशा सुर्खियों में रहा है। जिला कारागार में निरूद्ध बंदी पंचम लाल पुत्र शारदा प्रसाद के भाई ने बताया कि 23 दिसंबर को वह मुलाकात करने पहुंचा तो पता चला कि रुपये की खातिर उसके भाई के अलावा राम मिलन, नियाज आलम, आनंद बाबू, वीरेन्द्र कुमार, संजीव कुमार उर्फ लसटकिया को बंदी रक्षकों ने पीटा है। उधर साथियों की पिटाई के खफा बंदी लामबंद हो गए और अनशन शुरू कर दिया। गुरुवार से लगातार अनशन चल रहा है। जिसकी शिकायत बंदियों के परिजनों ने आईजी जेल के साथ जिला प्रशासन से की। उधर अनशन नहीं खत्म करने पर बंदियों को लगातार धमकी दी जा रही है। बंदियों के लामबंद होने से परिजनों की मुलाकात पर पाबंदी लगा दी गई है। जेल प्रशासन की तानाशाही से खफा बंदी पंचम के परिजनों ने डीजी जेल को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।