कैदी फरारी मामले में आखिरकार डिप्टी जेलर पर कार्रवाई की गाज गिर ही गई। कैदी के बयान के बाद एसपी ने डिप्टी जेलर के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत करा दिया। साथ ही जेल में बंद एक हत्यारोपी को भी डिप्टी जेलर के साथ षड्यंत्र का आरोपी बनाया गया है। डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी के लिए एसओजी और सदर कोतवाली पुलिस की टीम गठित कर दी गई है। उधर, रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी होते ही डिप्टी जेलर जिले से फरार हो गए हैं।
जिला जेल में हत्या के आरोप में बंद दीपक पांडेय की फरारी के मामले में नया मोड़ आ गया है। कैदी को उसके घर ले जाने और फरार कराने के आरोप में बंदी रक्षक सुनील और अवधेश तो पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं लेकिन कैदी ने सदर कोतवाली में जो बयान दिया उससे साफ हो गया है कि बंदी रक्षकों के साथ उसे घर ले जाने में डिप्टी जेलर भी साथ थे। घर तक ले जाने का प्लान जेल के अंदर हत्या के मामले में बंद कैदी सुशील मिश्र ने डिप्टी जेलर के इशारे पर रचा था। इसके लिए लेन देन की बात तय हुई।
जब दीपक पांडेय घर जाने को तैयार हो गया तो जेल में मौजूद डॉक्टर से उसका बीमारी का पर्चा बनवाकर बाहर निकाला गया। घर पहुंचने पर पैसे का इंतजाम न होने पर कैदी घर की छत से कूदकर भाग निकला। फरार हुए कैदी का बयान होने के बाद एसपी वीके मिश्र ने डिप्टी जेलर और सुशील मिश्र के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दिया। इतना ही नहीं उन्होंने डिप्टी जेलर धीरेंद्र कुमार की गिरफ्तारी के लिए एसओजी और सदर कोतवाली पुलिस की टीम भी गठित कर दिया है। उधर, रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी होते ही डिप्टी जेलर जिला छोड़कर फरार हो गया। उसका मोबाइल नंबर भी रविवार से स्विच ऑफ है। हालांकि गिरफ्तारी के लिए गठित टीम सर्विलांस के जरिए जेलर तक पहुंचने में जुट गई है।
जिला जेल में हत्या के आरोप में बंद कैदी दीपक पांडेय को उसके घर ले जाने के लिए एक लाख रुपये का सौदा डिप्टी जेलर से हुआ था। इसके लिए दीपक को जेल में बंद कैदी सुशील मिश्र ने डिप्टी जेलर के इशारे पर तैयार किया था। जब दीपक पांडेय घर पहुंचा तो उसके घर में फूटी कौड़ी नहीं थी। ऐसे में बगैर पैसे के लौटने पर उसे जेल में प्रताड़ित किया जा सकता था। इस भय से वह घर कूदकर भाग निकला था।
कौशाम्बी जेल में तैनात डिप्टी जेलर का कैदियों के साथ सांठगांठ और उन्हें घर तक ले जाने और फरार कराने का कोई नया कारनामा नहीं है। इससे पहले भी वह मेरठ और ज्ञानपुर जेल में तैनाती के दौरान चर्चाओं में रहे। तत्कालीन रिकार्ड को खंगाला जाय तो इनके काले कारनामे किसी को बताने की जरूरत नहीं होगी। कौशांबी जेल में तो उन्होंने हद ही कर रखी थी। कैदियों से वसूली, उन तक गांजा, सिगरेट, शराब आदि पहुंचाने में डिप्टी जेलर और सुनील गौड़ सिपाही की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। जिसका खुलासा उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर किए गए निरीक्षण के दौरान जिला जेल में होता रहा है लेकिन इस बावत कभी भी जेल प्रशासन के जिम्मेदार संजीदा होते नहीं दिखे।
। जिला जेल में नशेड़ी कैदियों के नशे का इंतजाम करने वालों का पूरा नेटवर्क सेट है। जेल में तैनात सिपाही सुनील गौड़ और अवधेश सदर कोतवाली के एक गांजा तस्कर से गांजे की खरीद करते थे। पांच सौ रुपये के गांजे की कीमत जेल में कैदियों से पांच हजार रुपये ली जाती थी। जिन कैदियों के पास पैसा नहीं रहता था उनको घर से पैसा मंगाने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। मोटी रकम की सेटिंग होने पर उन्हें घर तक ले जाने में भी डिप्टी जेलर और इन सिपाहियों को तनिक भी गुरेज नहीं रहता था। ऐसा ही जेल में बंद दीपक पांडेय के साथ भी किया गया है।
फरार बंदी की गिरफ्तारी के बाद उसका बयान लिया गया है। बयान की वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई है। मामले में दो सिपाहियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका था। बयान के बाद डिप्टी जेलर और जेल में बंद सुशील मिश्र को भी मुल्जिम बनाया गया है। डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है।
वीके मिश्र, एसपी कौशाम्बी