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बोतल में कब तक बंद रहेगा मौतों का राज

Tue, 04 Oct 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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दोआबा में छह माह के भीतर हुई सात लोगों की संदिग्ध मौतों का रहस्य आज भी सिपेट में बंद है। इनकी मौत इलाहाबाद में इलाज के दौरान हुई थी। जहां बिसरा प्रिजर्व कराने के बाद रख दिया गया। पोस्टमार्टम कराने के बाद कौशाम्बी पुलिस बिसरा प्रयोगशाला भेजना भूल गई। थानेदारों की इस लापरवाही पर डीआईजी ने एसपी को सप्ताह भर के भीतर बिसरा का परीक्षण कराने का फरमान जारी किया है।
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   हत्या या फिर संदिग्ध मौत दोआबा की पुलिस के लिए कोई मायने नहीं रखती है। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालकर पल्ला झाड़ लेती है। 9 अप्रैल से चार जुलाई के मध्य कौशाम्बी के सात लोगों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई।

सभी की मौत इलाहाबाद में एसआरएन अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद बिसरा प्रिजर्व कराने के बाद सिपेट में रखवा दिया। इसके बाद उसे भुला बैठी। सूत्रों की मानें तो बिसरा प्रिजर्व के बाद उसे परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजवाने का प्रावधान है। पर जिम्मेदारों ने ऐसा नहीं किया। इन सात रहस्यमयी मौतों का राज आज भी सिपेट में बंद है।  जिम्मेदारों की लापरवाही संज्ञान में आने पर डीआईजी विजय यादव ने पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी को पत्र भेज सात दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। उधर पत्र मिलने के बाद एसपी कौशाम्बी वीके मिश्र ने जिन थानों के बिसरा एसआरएन में पड़े है वहां के जिम्मेदारों को कड़ी हिदायत देते हुए तीन दिन के भीतर बिसरा का परीक्षण कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
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इनकी हुई थी संदिग्ध दशा में मौत
ओम प्रकाश पुत्र रामनरेश निवासी पचांभा पश्चिमशरीरा
उमेश कुमार पुत्र देवी प्रसाद निवासी मेडवारा पिपरी
विनोद कुमार पुत्र प्रेमचंद्र निवासी साखा सैनी
सतीश मौर्य पुत्र अशोक कुमार निवासी मलाक पिंजरी सैनी
आनंद मिश्र पुत्र राजू मिश्र निवासी टेवां मंझनपुर
रोहणी कुमार पुत्र विन्देश्वरी निवासी कायमपुर कौशांबी
नरेश कुमार पुत्र झल्लर निवासी  सिकंदरपुर बजहा कोखराज।
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