दोआबा में गांजा कारोबार के तिलिस्म का रहस्य परत-दर-परत खुलने लगा है। गांजा कारोबार से एक भाजपा नेता के भी तार जुड़े हैं। खैर, गांजा के खिलाफ चल रहे प्रशासन के अभियान में अफसर बोरियों को छोड़ पुड़िया तलाश रहे हैं। जबकि पुड़िया के अगल-बगल ही गांजा से भरी बोरियां रखी रहती हैं। ऐसे में काले कारोबार की बोरियों पर प्रशासनिक अफसरों की नजर क्यों नहीं पड़ती। इनकी बरामदगी कब होगी, इस ओर जिले भर की निगाहें टिक गई हैं।
दोआबा में गांजे के काले कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने तीनों एसडीएम और एसपी वीरेंद्र कुमार मिश्र ने तीनों सीओ को निर्देश दे रखा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मातहतों ने अब तक भांग की छह दुकानों में छापेमारी की। इनमे एसडीएम सिराथू विवेक चतुर्वेदी सिराथू, अजुहा और कनवार की दुकानों में छापेमारी कर चुकें हैं। दो दुकानों को उन्होंने सीज भी कर दिया। जबकि अजुहा में गांजा मिलने के बाद भी उस पर कार्रवाई नहीं की गई।
एसडीएम चायल ने सराय अकिल और काजीपुर दुकान में छापेमारी की और गांजा मिलने पर सीज कर दिया। एसडीएम सदर तो कई दुकानों पर पहुंचे पर उनके हाथ सफलता नहीं लगी। इस दौरान एसडीएम चायल और सिराथू ने पुड़िया तो बरामद किया पर बोरियों में रखे गांजे तक उनके हाथ नहीं पहुंच सके। इसे लेकर सवाल उठने लगा है कि अफसरों को आखिर बोरियां क्यों नहीं मिल रही हैं। बहरहाल, गांजा भरी बोरियां कब तक बरामद होंगी इस ओर जिले भर की निगाहें टिक गईं हैं। कुछ भी हो जब तक बोरियों में रखे गांजे तक पुलिस और प्रशासन के हाथ नहीं पहुंचते तब तक जिले में गांजे के काले कारोबार पर अंकुश लग पाना नामुमकिन है।
दोआबा में चल रहा गांजे का काला कारोबार बंद हो ऐसा आबकारी टीम नहीं चाहती। एक तरह से उसने भांग के कारोबारियों को गांजा बेचने की छूट दे रखी है। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने डीओ आबकारी को गांजे के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने का निर्देश दे रखा है लेकिन इस कारोबार को संचालित कराने वाले आबकारी विभाग के जिम्मेदारों ने एक भी दुकान से गांजे की बरामदगी नहीं की। ऐसा नहीं कि वह दुकानों पर छापेमारी करने नहीं पहुंचे। पिछले दिनों आबकारी इंस्पेक्टर ने ओसा की दुकान में छापेमारी की थी लेकिन यहां से दो-चार पुड़िया लेकर वापस लौट आए और बरामदगी तक नहीं दिखाई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस काले कारोबार के पीछे आबकारी विभाग की क्या मंशा है।
दोआबा में गांजे के अवैध कारोबार को एक भाजपा नेता का सहयोग प्राप्त है। सूत्रों की माने तो इस कद्दावर की भूमिका भांग की दुकानों के आवंटन के दौरान महत्वपूर्ण रही। इसी के सहयोग से गिरजेश तिवारी के नाम जिले भर की दुकानों का आवंटन कर दिया गया। आवंटन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस कद्दावर ने जिले भर की दुकान का लाइसेंस पाने वाले अनुज्ञापी से सौदा किया। मोटी रकम मिलने के बाद नेता ने गांजे के कारोबार में भी हिस्सा ले लिया। कद्दावर के कुर्ते का असर इतना अधिक है कि जिले के अफसर पुड़िया तो पकड़ रहे हैं पर बोरियों तक हाथ ले जाने से कतराते नजर आ रहे हैं।
भांग और गांजे के कारोबार की हकीकत क्या है सब जानते हैं। इसमें मैं कुछ नहीं कह सकता।
बीपी मानिक, जिला आबकारी अधिकारी