बालू के अवैध कारोबार से जुड़े अफसरों के खिलाफ सीबीआई से पहले शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खनिज मंत्री और प्रमुख सचिव की तरह जिले के उन अफसरों पर शासन की गाज कभी भी गिर सकती है जिनकी संलिप्तता अवैध खनन में थी। इसे लेकर जहां संबंधित अधिकारियों की नींद हराम है, वहीं कार्रवाई के भय से कारोबारी चार दिन से भूमिगत हो गए हैं।
अवैध खनन मामले में सीबीआई द्वारा न्यायालय को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पार्टी की छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और प्रमुख सचिव खनिकर्म डॉ. गुरुदीप सिंह पर सीबीआई से पहले ही शिकंजा कस दिया है। सरकार का मानना है कि सीबीआई की अगली जांच में शासन से लेकर जिले स्तर पर तैनात अफसरों और अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई तय है।
ऐसे में वह अब खनिज निदेशालय से लेकर जिले स्तर के अफसरों पर सीबीआई से पहले कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। इसकी प्रबल संभावना को देखते हुए जिले के अधिकारी बेचैन हो गए हैं। कलेक्ट्रेट से लेकर यमुना की तराई तक इसकी चर्चा तेज हो चली है। मुख्यमंत्री के बदले तेवर से अधिकारियों की नींद उड़ गई है। उन्हें भी इस बात का भय सता रहा है कि उनके खिलाफ शासन से कभी भी कार्रवाई का फरमान जारी हो सकता है। दूसरी ओर मामले में कार्रवाई शुरू होती देख बालू माफिया की आमदरफ्त मुख्यालय में कम हो गई है। एक-दो को छोड़ कोई भी बालू कारोबारी नजर नहीं आ रहा है। चिह्नित लोग भूमिगत हो गए हैं।
सिंडीकेट मालिक का होगा सीबीआई से सामना
दोआबा में अक्टूबर 2015 से सिंडीकेट के इशारे पर बालू का अवैध खनन शुरू किया गया था। इसके बाद लखनऊ से तीन बार सिंडीकेट बदला गया। कभी तराई में पंजाबियों का दबदबा रहा तो कभी लखनऊ के कारोबारी जिले में दस्तक देकर अवैध खनन कराते रहे। इस दौरान प्रशासन द्वारा समय-समय पर शिकंजा तो कसा गया, लेकिन दबाव के चलते कुछ दिन मामला ठंडा पड़ जाता था। अगस्त में आई सीबीआई टीम के सदस्यों ने सिंडीकेट के गुर्गे रिजवान और रानू को तलब कर पूछताछ की थी लेकिन इस बार सिंडीकेट के सरगना को सीबीआई टीम तलब कर गहराई से पूछताछ करेगी।