बसपा के नवागत जिलाध्यक्ष का बसपा कार्यालय की अभी चाभी नहीं मिली है। मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष के पास इसकी चाभी थी। चाभी मिलती, इसके पहले ही एक व्यक्ति ने अपनी भूमि पर कब्जा करने का आरोप जड़ दिया। हालांकि बसपाई इसको साजिश बता रहे हैं।
पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज को बसपा से निकाले जाने के बाद कार्यकर्ताओं ने ताबड़तोड़ इस्तीफा देना शुरू कर दिया था। प्रतिदिन सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दिया तो बसपा के पदाधिकारी हिल गए। नतीजतन बसपा ने युवा नेता महेंद्र गौतम को जिलाध्यक्ष की बागडोर सौंप दी। महेंद्र गौतम ने आते ही कार्यकर्ताओं को लामबंद करना शुरू कर दिया। साथ ही नए लोगों को जोड़ने पर उन्होंने ज्यादा जोर भी दिया। इसका नतीजा यह रहा कि पूर्व मंत्री के समर्थक भी नए सिरे से विचार करने लगे। महेंद्र गौतम व इंद्रजीत सरोज के मोर्चेबंदी में कार्यकर्ता उलझ गए। यह सब चल ही रहा था कि बसपा जिला कार्यालय का नया पेंच फंस गया। बसपा जिला कार्यालय की देखरेख मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष के पास थी।
उन्होंने अभी कार्यालय खालीं नही किया है। इनको भी पूर्व मंत्री सरोज का खास का बताया जा रहा है। दो दिन में कार्यालय खाली होने की बात हुई थी। इसी बीच ओसा के एक व्यक्ति ने अपनी आराजी के एक विस्वा में कार्यालय बना होने का दावा ठोंक दिया। इसकी जानकारी होते ही जिलाध्यक्ष की परेशानी बढ़ गई। महेंद्र गौतम के समर्थकों का कहना है कि यह एक साजिश है, जानबूझकर बसपा कार्यकर्ताओं को परेशान करनी की। तहसील स्तर से पता कराया जा रहा है कि कब्जा करने का आरोप लगाने वाले व्यक्ति की सच्चाई क्या है।