यमुना घाट से बालू का अवैध खनन रोकने की प्रशासनिक कवायद नाकाम हो रही है। इसकी बानगी पिपरी इलाके में किसी भी दिन देखी जा सकती है। खनन पर पाबंदी के लिए रास्ता खुदवाने के बाद माफियाओं ने गधे और खच्चरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अवैध खनन के इस खेल में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
पिपरी इलाके में जिले के सैदपुर, सेवढ़ा, औधन बालू घाट पड़ते हैं। इसी थाना क्षेत्र में इलाहाबाद जिले के फुलवा, ककरहा, बिसौना व असरावल खुर्द घाट भी आते हैं। जिले में पट्टों की अवधि समाप्त होते ही आठ दिसंबर के बाद से अवैध खनन का खेल शुरू हो गया है। इलाकाई लोगों की मानें तो इन घाटों पर अवैध खनन में स्थानी नाविकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वह यमुना की छाती से लाल सोना निकालकर कारोबारियों के हाथों बेच देते हैं।
इसके बाद कारोबारी ट्रैक्टर लेकर घाट पर पहुंचते हैं और बालू लदवाकर बेंचने के लिए भेज देते हैं। अफसरों के निरीक्षण में अवैध खनन की पुष्टि होने पर पिछले दिनों सैदपुर घाट में परिवहन के लिए बना रास्ता जेसीबी से खुदवा दिया गया था। इसके बाद कारोबारी अब घाट से खच्चर के सहारे बालू ऊपर लाकर बेच रहे हैं। अवैध खनन का यह खेल शाम के छह बजते ही शुरू हो जाता है और सुबह तक चलता है। सूत्रों की मानें तो रोजाना तकरीबन इलाके के विभिन्न घाटों से दस हजार घन फिट बालू का अवैध खनन हो रहा है। इसके चलते सरकारी खजाने में लाखों की चपत लग रही है।