मंझनपुर। दोआबा की पुलिस गोहत्यारों का नाम सार्वजनिक करने से परहेज कर रही है। एसपी के निर्देश के बावजूद जनपद की अधिकतर कोतवालियों में महीने भर बाद भी इनकी सूची नहीं चस्पा की जा सकी है। इसे लेकर कप्तान नाराज हैं। उन्होंने कार्रवाई करने की बात कही है।
डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) ने करीब सवा महीने पहले गोवध और पशु तस्करी करने वालों का नाम सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। कहा था कि टॉप-10 गोहत्यारों व पशु तस्करों की लिस्ट बनाकर कोतवाली की दीवार पर चस्पा की जाए। लिस्ट ऐसी जगह चस्पा की जानी थी, जहां से उसपर हर किसी की निगाह पड़े। लिस्ट में अपराधी की स्थिति यानी वह जेल के बाहर है अथवा फरार है, इस बात का जिक्र किए जाने की हिदायत दी थी।
डीजीपी के निर्देश का अनुपालन करने का फरमान एसपी प्रदीप गुप्ता महीने भर पूर्व ही जारी कर चुके हैं। इसके बाद भी जनपद के कोतवाल मनमानी पर उतारू हैं। उन्होंने अभी तक लिस्ट चस्पा नहीं करवाई है। सिर्फ नगर कोतवाल राकेश चौरसिया ने सूची लगवा दी है। मामले में एसपी प्रदीप गुप्ता का कहना है कि इसकी जांच कराने के बाद लापरवाह कोतवालों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
क्या था मकसद
गोवध और पशु तस्करी करने वालों का नाम-पता सार्वजनिक कराने के पीछे अधिकारियों की मंशा ये थी कि कोई अपराधी फरार चल रहा हुआ तो आम लोग भी उसकी गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दे सकेंगे। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी करने में आसानी होगी। पर, दोआबा के कोतवाल हैं कि एसपी और डीजीपी के आदेश तक को ठेंगे पर मारे हुए हैं।