सिराथू तहसील क्षेत्र के अफजलपुर वारी गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई तनातनी के कारण राजाराम का शव लेकर 40 घंटे तक परिजन परेशान रहे। दो दिनों तक चली पंचायत के बाद गांव वालों ने बीच का रास्ता निकालते हुए मंगलवार को तालाब किनारे खाली पड़ी बंजर जमीन पर शव का अंतिम संस्कार किया। उधर, वृद्ध का अंतिम संस्कार हो जाने पर दोनों पक्षों के साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने भी राहत की सांस ली।
सिराथू तहसील क्षेत्र के अफजलपुर वारी गांव के रहने वाले राजाराम की रविवार की रात मौत हो गई थी। सोमवार की सुबह घरवाले शव लेकर उस स्थान पर गए, जहां परिवार के पूर्वजोें का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है। पर, गांव के ही एक परिवार ने इस जमीन को अपनी बताते हुए यहां अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इसे लेकर गांव के दो पक्ष आमने-सामने हो गए। पीड़ित परिवार ने घटना की शिकायत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी की। विवाद की सूचना पर सीओ सिराथू, एसओ पइंसा और राजस्वकर्मी गांव पहुंचे। जांच में सामने आया कि उक्त जमीन गांव के ही एक व्यक्ति के नाम पट्टा है। सीओ सिराथू जनार्दन तिवारी ने घरवालों को ग्रामसभा की खाली पड़ी दूसरी जमीन पर अंतिम संस्कार को कहा। हालांकि तब घरवालों ने यह कहकर अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था।
मृत राजाराम का लड़का नन्हे लाल मुंबई से घर आ रहा है। उसके आने के बाद ही शव के अंतिम संस्कार के स्थान का निर्णय होगा। मंगलवार की दोपहर बेटे के घर आने के बाद स्थानीय लोगों ने उसे समझाया। बड़े-बुजुर्गों के कहने पर वह तालाब के समीप खाली पड़ी बंजर भूमि में पिता के अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गया। दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद मंगलवार की शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसओ पइंसा राम आसरे ने बताया कि पुरानी जगह पर जब तक पट्टा नहीं था, राजाराम के परिवार वाले शव दफनाते थे। उस भूमि का पट्टा राजस्व विभाग ने एक व्यक्ति के नाम कर दिया है। ऐसे में उस जमीन पर अंतिम संस्कार किया जाना न्याय संगत नहीं था।