जिले में अस्थाई गोशालाओं में शासन-सत्ता के दबाव में अन्ना मवेशियों को तो रखा गया है। लेकिन देखरेख के अभाव में यहां मौजूद मवेशी भूख और प्यास सेे तड़प रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी अभिलेखों में पांच महीने के दौरान गोशालाओं में रखे गए मवेशियों द्वारा 28 लाख रुपये कीमत का चारा-पानी खा जाने का दावा किया जा रहा है।
प्रदेश में गोवध को लेकर कानून व्यवस्था नहीं बिगड़े, इसके लिए सरकार ने पिछले साल कान्हा गोशाला बनाकर गोवंश के संरक्षण का निर्णय लिया। मुख्यालय के समीप कादिराबाद में एक करोड़ 20 लाख की लागत से गोशाला का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। हालांकि अभी तक काम अधूरा है। उधर गोवंश तस्करी पर लगी लगाम के चलते यमुना पार इलाके से बड़ी संख्या में मवेशी जिले में छोड़ दिए गए। इन मवेशियों को गोशाला में रखने के लिए प्रशासन ने अस्थाई तौर पर नगर पंचायतों व ग्राम सभाओं में गोशाला का निर्माण कराया। सीवीओ डॉ. बीपी पांडेय का दावा है कि जिले में बनाई गई अस्थाई गोशाला में 1260 गोवंश रखे गए हैं। एक गोवंश पर रोजाना तीस रुपये चारा-पानी व देखभाल के लिए खर्च किया जाता है। शासन ने इसके लिए जिले को 63 लाख का बजट जारी किया है। इसके सापेक्ष अब तक 28 लाख रुपये चारा-पानी पर खर्च किया जा चुका है। जिसमें 23 लाख गांवों में बनी गोशाला पर खर्च किया गया है। जबकि पांच लाख नगर पंचायतों की गोशाला पर खर्च किया गया है।