मंझनपुर। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी व एंबुलेंस चालकों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। जन्म के पांच दिन बाद बच्ची की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए लेकर आए थे। हालत नाजुक होने पर उसे इलाहाबाद रेफर किया गया। इसकी स्लिप भी दी गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं दी गई। इससे बच्ची की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने देर शाम जिला अस्पताल में शव रखकर जमकर हंगामा किया।
दुर्गापुर की रीना देवी पत्नी सरोज कुमार ने 10 जून को जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था। प्रसव के 36 घंटा बाद महिला को घर भेज दिया गया था। बुधवार को बच्ची की अचानक हालत बिगड़ गई। दोपहर को बच्ची को लेकर परिजन जिला अस्पताल आए। हालत नाजुक होने पर इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सकों ने उसे इलाहाबाद रेफर कर दिया। रेफर स्लिप देकर उन्होंने एंबुलेंस बुलाने की बात कही।
परिजन रेफर पर्ची लिए घूमते रहे, लेकिन उन्हें एंबुलेंस नहीं मिली और दो घंटे बाद बच्ची की मौत हो गई। रीना देवी व सरोज कुमार ने इसकी जानकारी अपने रिश्तेदारों को दी। रात करीब आठ बजे रिश्तेदार जिला अस्पताल आए। रीना देवी के भाई हंसराज ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों ने शव रखकर डीएम को बुलाने की मांग की। इससे डॉक्टरों के होश उड़ गए।
जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी को मिली एंबुलेंस में डीजल नहीं है। बजट खत्म होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। यही कारण है कि अधिकारी एंबुलेंस में डीजल नहीं डलवा पा रहे हैं, जिसका शिकार आम आदमी हो रहा है।
जिला अस्पताल से संचालित होने वाली एंबुलेंस की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग को डीजल का बजट नहीं मिला है। बजट न होने पर एंबुलेंस मेें डीजल नहीं भरवाया जा रहा है। इसको लेकर सुबह से शाम तक अस्पतालों में चालक और डॉक्टरों के बीच किचकिच होती है। पूनम की मौत के बाद मामला फंसा तो अधिकारियों ने यह राज खोला। अधिकारियों ने जल्द से जल्द बजट देने की मांग शासन से की है।
जिला अस्पताल से एंबुलेंस न मिलने पर बच्ची ने तोड़ा दम
परिजनों ने किया हंगामा, डॉक्टर पर जबरन रोकने का लगाया आरोप