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पट्टाधारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा सकती है सीबीआई

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पट्टाधारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा सकती है सीबीआई
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बयानों का कराया सत्यापन, कार्रवाई शुरू
बुधवार शाम टीम लखनऊ के लिए रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। अवैध खनन की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बालू कारोबारियाें के पहले लिए गए बयानों का सत्यापन बुधवार को किया। बयान में कोई बदलाव न होने पर कारोबारियों से बहुत ज्यादा सवाल-जवाब भी नहीं किए गए। अब इस मामले में सीबीआई पट्टाधारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी में है। पूछताछ के दौरान इसकी संभावना टीम ने जताई है। इससे कारोबारियों की नींद उड़ गई है। बुधवार की शाम टीम अभिलेखों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
सीबीआई ने बालू माफिया पर शिकंजा कस दिया है। सिंडीकेट के अलावा बालू पट्टाधारक व भंडारण करने वाले उनके निशाने पर हैं। तीन दिन के भीतर एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। सीबीआई के इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र व उनकी टीम ने प्रारंभिक जांच के दौरान जिन लोगों के बयान दर्ज किए थे, उनके बयानों का सत्यापन कराया। सभी लोग अपने बयान पर कायम हैं। खनन विभाग से लिए गए अभिलेखों की भी बारीकी से छानबीन की जा रही है। बालू पट्टाधारकों के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है। इसका अंदेशा टीम ने ही पूछताछ के दौरान कारोबारियों से जताया है। इस आशंका को देखते हुए कारोबारियों में हड़कंप है। वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2016 तक बालू खनन करने वालों की जांच हो रही है। घाटों का आवंटन कैसे हुआ? इसकी प्रक्रिया क्या थी? इसकी एक-एक जानकारी जुटाने के बाद अब सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। बाधित अवधि का पेंच कारोबारियों के गले की फांस बन चुका है। वह यह नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर कैसे उनको बाधित अवधि का लाभ मिला? इतना ही नहीं बालू कारोबारियों से टीम का एक प्रमुख सवाल रहा। वह यह था कि अधिकारियों से उनके कैसे संबंध थे? रोक के बाद उन्होंने किसकी इजाजत से बालू का खनन किया। इस मामले में कारोबारियों ने उन अधिकारियों के नाम बताए हैं, जिनके निर्देश पर उन्होंने घाटों पर जेसीबी चलवाकर अवैध खनन किया था।
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सिंडीकेट की घेराबंदी तेज, हरियाणा-राजस्थान जा सकती है टीम
सीबीआई की पूछताछ कारोबारियों से लगभग हो चुकी है। भंडारण करने वालों ने भी सीबीआई का सामना किया है। अब बारी सिंडीकेट की है। सिंडीकेट के प्रमुख सदस्यों की घेराबंदी शुरू हो चुकी है। सपा सरकार में हरियाणा व राजस्थान से आए सिंडीकेट के सदस्यों ने यहां बडे़ पैमाने पर बालू का अवैध खनन किया था। अवैध खनन के खेल में सारी हदें पार कर दी गई थीं। सीबीआई सिंडीकेट के प्रमुख सदस्यों तक पहुंचने के लिए हरियाणा व राजस्थान भी जा सकती है। इसकी तैयारी भी हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है।
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सीबीआई के राडार पर है जिला पंचायत
केंद्रीय जांच ब्यूरो की निगाह में जिला पंचायत भी है। बालू खनन से जिला पंचायत का कोई लेना-देना नहीं है, इसके बावजूद जिला पंचायत बैरियर का ठेका देकर वसूली करवाती थी। सिंडीकेट ने जब बालू खनन शुरू किया तो जिला पंचायत ने बैरियर लगवाकर बालू ढोने वाले वाहनों से वसूली की थी। बैरियर पर हुई वसूली की एक-एक पर्ची खनन विभाग के पास है। पिछली बार भी सीबीआई ने इन पर्चियों की तस्दीक की थी। इस मामले में जिला पंचायत के जिम्मेदारों से भी सवाल-जवाब करने की तैयारी है।
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खनन विभाग में सन्नाटा, कारोबारियों ने बनाई दूरी
खनन विभाग में सीबीआई के आने के बाद से सन्नाटा पसर गया है। कारोबारियों ने इस कार्यालय से दूरी बना ली है। कारोबारियों की हालत पतली है। वह जांच को लेकर सशंकित हैं कि कहीं वह भी न फंस जाएं। अधिकांश कारोबारी अब मोबाइल पर बातचीत करने से परहेज कर रहे हैं। वहीं कार्यालय के कर्मचारी भी सतर्क हैं। वह भी मोबाइल पर बातचीत करने में टालमटोल कर रहे हैं। बालू खनन की बात होते ही वह कॉल काट देते हैं।
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