चचेरे भाइयों समेत चार के मौत की खबर पर चीखों से गूंजा जुगराजपुर
कमाने के लिए अहमदाबाद जा रहे थे युवक, इटावा में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आए
साथ गए अदालती की शिनाख्त पर पुलिस ने परिजनों को दी खबर
फोटो नं-3 से 10 तक
अमर उजाला ब्यूरो
कनैली। इटावा में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे की खबर आते ही जुगराजपुर गांव चीखों से गूंज उठा। कमाऊ पूतों के मरने की जानकारी पाकर परिवार वाले दहाड़े मारकर रो पड़े। ग्रामीण भी सन्न रह गए। परिजन आनन फानन में मृतकों का शव लाने के लिए रवाना हो गए।
जुगराजपुर के ग्रामीण सोमवार सुबह दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। तभी अभिषेक उर्फ जीतू (17) पुत्र राजेन्द्र, लालचंद्र (18) पुत्र जवाहरलाल, पिंटू (18) पुत्र छोटई व सुरेन्द्र (18) पुत्र भइयालाल की मौत की खबर आ गई। गांव का अदालती पुत्र बुदुन कई सालों से अहमदाबाद में रहकर एक बैग बनाने की फैक्ट्री में काम करता था। वही अपने साथ इन सभी को लेकर गया था। रविवार दोपहर सब खुशी-खुशी घर से निकले और कानपुर पहुंचे। वहां से अवध एक्सप्रेस पर सवार होकर अहमदाबाद के लिए रवाना हुए। इटावा जिले के बरलई स्टेशन के समीप राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से अभिषेक, लालचंद्र, पिंटू तथा सुरेन्द्र की मौत हो गई। जबकि अदालती घायल हो गया। बताया जाता है कि अदालती ने ही मृतकों की शिनाख्त की। इसके बाद इटावा पुलिस ने सरायअकिल पुलिस से संपर्क किया। कनैली चौकी पुलिस ने जुगराजपुर पहुंचकर पीड़ित परिवारों को हादसे के बारे में बताया तो सभी चीत्कार मारकर रो पड़े। रोने-पीटने की आवाज सुन मौकेे पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोगों को कुछ पल के लिए घटना पर यकीन नहीं हो रहा था। बाद में कुछ ग्रामीण व परिजन आननफानन एक गाड़ी रिजर्व कर इटावा के लिए रवाना हो गए।
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चचेरे भाई थे लालचंद्र, सुरेन्द्र और अभिषेक
कनैली (ब्यूरो)। ट्रेन हादसे में मौत का शिकार हुए लालचंद्र, सुरेन्द्र और अभिषेक आपस में चचेरे भाई थे। जबकि पिंटू इनका पड़ोसी था। परिवार का बोझ कम करने की खातिर कमाने के लिए सभी अहमदाबाद जा रहे थे। रास्ते में उन्हें मौत ने अपनी आगोश में ले लिया।
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ढांढस बंधाने में जुटे ग्रामीण, नहीं जले चूल्हे
कनैली (ब्यूरो)। घटना के बाद पीड़ित परिवारीजनों को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पर ग्रामीणों की भीड़ जमा रही। देखा गया कि गांव के अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले। लोगों ने बच्चों, बीमारों को बाहर से कुछ मंगाकर खिलवा दिया। खुद को खाने का ख्याल ही नहीं आया।
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शांति के लिए बुढ़ापे की लाठी था पिंटू
कनैली (ब्यूरो)। ट्रेन हादसे में मौत का शिकार हुआ पिंटू अपनी मां शांति देवी की बुढ़ापे की लाठी था। वैसे तो पिंटू के तीन और भाई हैं। सबसे बड़े राजू और पप्पू की शादी हो चुकी है। दोनों मां से अलग दूसरे घरों में रहते हैं। पिंटू तीसरे नम्बर का था। उससे छोटा बब्लू मां के साथ रहता था। बब्लू अभी पढ़ाई कर रहा है। पिंटू ही मजदूरी करके उसे पढ़ाने के साथ मां का भी ख्याल रखता था। अब पिंटू की मौत के बाद उसकी मां शांति और छोटा भाई बब्लू अकेले से हो गए हैं। हालांकि राजू, पप्पू हैं। वही, मां के साथ बब्लू को भी सहारा देने का भरोसा दिला रहे हैं।
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अभिषेक का मुंह तक नहीं देख सकेगा भाई
कनैली (ब्यूरो)। काल के गाल में समाए अभिषेक का बड़ा भाई आदित्य कुवैत में रहता है। हादसे की खबर उसे दे दी गई है। पर, वो आ नहीं सकेगा। आदित्य अंतिम दफा अभिषेक का मुंह भी नहीं देख सका। सोमवार को पूरे दिन वह पल-पल में परिजनों और दोस्तों को फोन करके रो रहा था। सभी उसे दिलासा दे रहे थे।
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सुरेन्द्र को मना कर रही थीं प्रिया-नेहा
कनैली (ब्यूरो)। जुगराजपुर निवासी भइलाल के चार बेटे हैं। सबसे बड़ा जितेन्द्र, फिर वीरेन्द्र तीसरे नम्बर पर सुरेन्द्र था। जो अब दुनिया में नहीं रहा। उससे छोटा शुभम है। दो बेटियां प्रिया और नेहा हैं। प्रिया, नेहा सुरेन्द्र को परदेश जाने से रोक रही थीं। पर, किसी ने उनकी नहीं सुनी। मौत की खबर आने के बाद से पूरा परिवार बदहवाश है।
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टीटीई पर कार्रवाई की मंाग
कनैली (ब्यूरो)। परिजनों का आरोप है कि टीटीई युवकों से रिश्वत की मांग कर रहा था। उसी से बचने के लिए बलरई स्टेशन पर सभी उल्टी दिशा से कूदकर भागे और हादसे का शिकार हो गए। परिवार वालों ने टीटीई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है।
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माननीयों ने नहीं ली सुधि
कनैली (ब्यूरो)। दर्दनाक हादसे की खबर सुबह ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। पूरा जिला दुर्घटना के बारे में जान गया। पर, माननीय कान में रुई डालकर बैठे रहे। कोई भी पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने गांव नहीं पहुंच सका। लोगों का कहना था कि अभी चुनाव होता तो नेताओं की लाइन लग जाती।