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Kaushambi News: समझौते के बाद दोबारा पीड़ित व गवाह का मुकरना नहीं होगा आसान

Mon, 01 Jul 2024 06:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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आज से सभी आपराधिक घटनाओं में नए कानून के हिसाब से मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नए कानून में खास बात ये है कि संगीन अपराधों में सत्र परीक्षण के दौरान धमकी व लालच वश समझौता करने के बाद दोबारा पीड़ित व गवाहों का मुकरना आसान नहीं होगा।
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भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी। आईपीसी में 511 धाराएं थी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। धाराओं का क्रम बदला गया है। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहलाएगी। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में अब इसमें 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाएगा। पुराने अधिनियम में 167 प्रावधान थे। नए में 170 प्रावधान हो गए हैं।
इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया है। नए कानून में पुलिस के लिए विवेचना में घटनास्थल पर पहुंचने से लेकर हर कदम पर वीडियो रिकॉर्डिंग व वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित करने की बाध्यता है। वीडियो रिकार्डिंग अदालत में ट्रायल के दौरान मजबूत साक्ष्य होंगे।
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आज से दर्ज मुकदमों का नए कानून से होगा ट्रायल

नए कानून के अनुसार जो मुकदमे दर्ज होंगे, उनका ट्रायल नए कानून से होगा। वहीं पुराने कानून के तहत 30 जून की रात 12 बजे से पहले दर्ज मुकदमों का ट्रायल पुराने कानून से ही होगा। दीवानी न्यायालय में पहले से दाखिल मुकदमे पुराने कानून से ही चलाए जाएंगे।



गवाह को ऑनलाइन समन-गवाही की सहूलियत
नए कानून में सबसे अधिक सुविधा गवाह व वादी को दी गई है। अगर गवाह को सूचना नहीं मिल पा रही है तो वह व्हाट्सएप पर मिलने वाले समन व वारंट को भी प्राप्त होना समझा जाएगा।



वीडियोग्राफी के बीच होगा गवाह का बयान

पुलिस अब तक घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संकलन व पब्लिक के किसी भी गवाह के बयान अपने अनुसार लिख लेती थी। मगर अब सब कुछ वीडियो कैमरे की निगरानी में होगा। इससे अदालत में इन साक्ष्यों को झुठलाया नहीं जा सकेगा। साथ ही साक्ष्य में किसी तरह की हेराफेरी भी नहीं की जा सकेगी।



नए कानून में काफी कुछ बदलाव हुए हैं। आईपीसी में दंडात्मक प्रक्रिया थी, उसे अब न्यायिक प्रक्रिया के रूप में लाया गया है। अब नए मुकदमों का ट्रायल नए कानून के अनुसार होगा। पुराने मुकदमों में पुराने कानून से ट्रायल चलेगा।


- मोहनराम यादव, संयुक्त निदेशक अभियोजन





नए कानून में निर्णय जल्दी होगा। आरोप पत्र दाखिल होने के फौरन बाद ट्रायल शुरू हो जाएगा। इससे पीड़ितों को जल्दी इंसाफ मिल सकेगा। नए कानून के अनुसार हमारी तैयारियां पूरी हैं। प्रशिक्षण के आधार पर हम काम करेंगे।

सोमेश्वर तिवारी, डीजीसी फौजदारी





नए कानून में बहुत से ऐसे बदलाव हुए हैं, जो संगीन मामलों में अपराधियों के लिए मुश्किल भरे हैं। इसमें वीडियो व वैज्ञानिक साक्ष्यों के चलते अब अदालत के बाहर समझौता करना आसान नहीं होगा।
-रमेश त्रिपाठी, वरिष्ठ एडीजीसी




पुलिस के विवेचकों को नए कानून के बाबत प्रशिक्षण दिया गया है। साथ में मुंशी का काम करने वाले स्टाफ को भी प्रशिक्षण दिया गया है। आज से नए कानून के तहत थानों में मुकदमे दर्ज करने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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-बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी
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