सदर तहसील के सोंधिया गांव में 62 साल पहले हुई चकबंदी में तालाब की करीब 20 बीघा 14 बिस्वा जमीन को भूमिधरी के रूप में 18 लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया था। दो दिन पहले इसका खुलासा तब हुआ, जब एक मामले की जांच करने तहसील के अधिकारी गांव पहुंचे। अब भूमि फिर से तालाब के नाम दर्ज करा दी गई है।
राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार तालाब, बंजर, खलिहान और श्मशान समेत अन्य सरकारी जमीनें हमेशा चकबंदी से मुक्त होती हैं। दूसरे काश्तकारों की जमीनें बदल सकती हैं। इन सरकारी भूमि का रूप बदला नहीं जा सकता। यह जिस स्थिति में है, उसी में रहती हैं।
इस नियम को ताक पर रखकर सदर तहसील के सोंधिया गांव में तालाब के रूप में दर्ज 20 बीघा 14 बिस्वा भूमि (गाटा संख्या 656) को भूमिधरी में बदल दिया गया। चकबंदी में लगे अधिकारियों ने जमीन गांव स्थित महारानी जानकी जी कुटी ट्रस्ट समेत 18 लोगों के नाम दर्ज कर दी। इसी में कुटी बनी है।
इसके अलावा लोग खेती भी करते हैँ। दो दिन पहले गांव के किशनदास ने डीएम से शिकायत की। आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर लगे पेड़ की लकड़ी कोई और उठा ले गया। पड़ोसियों से पुराना विवाद चल रहा है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम आकाश सिंह ने नायब तहसीलदार मोबीन अहमद और ओपी सिंह को जांच के लिए भेजा।
पड़ताल के दौरान अधिकारियों ने जब सरकारी दस्तावेज खंगाले तो फर्जीवाड़ा सामने आया। अधिकारियों ने मामले की रिपोर्ट एसडीएम को दी। एसडीएम ने जमीन को फिर से सरकारी दस्तावेजों में तालाब के रूप में दर्ज करा दिया है।
इनके नाम दर्ज है तालाब की भूमि
तालाब की जमीन महारानी जानकी जी कुटी, सरदार, नरेश, महेश, सुरेश, दिक्खनी, हीरामनी, घनश्याम, प्रेम कुमार, शुकुरू, बाबूलाल, बासदेव, श्यामलाल, मेधिया, बाबूलाल, देशराज, राम जियावन, रामराज के नाम भूमिधरी के रूप में दर्ज कराई गई थी।
सोंधिया गांव में तालाब की जमीन गलत तरीके से एक कुटी समेत कई अन्य लोगों के नाम भूमिधरी के रूप में दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई है। यह भूमि पुन: तालाब के रूप में दर्ज कर दी गई है। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल था।
आकाश सिंह, एसडीएम, सदर