सबकुछ ठीकठाक रहा तो जिले के 53 श्रमिक जल्द ही इस्राइल नौकरी करने जाएंगे। इस्राइल सरकार ने इन श्रमिकों का चयन कर लिया है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में चयनित श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। विभाग अब इनका बीजा और पासपोर्ट तैयार कराने में जुटा है।
पिछले साल हमास से हुए युद्ध में इस्राइल का भारी नुकसान हुआ था। बड़ी संख्या में इमारतें ध्वस्त हो गईं थी। तहस-नहस हुए शहर को फिर से संवारने के लिए इस्राइल सरकार ने भारत सरकार से मदद मांगी है। 1.39 लाख रुपये प्रति माह की दर से कुशल श्रमिकों की डिमांड की गई है।
श्रमिकों को भारत सरकार के राष्ट्रीय काैशल विकास कॉरपोरेशन के माध्यम से रोजगार देने के लिए आवेदन मांगे गए थे। जिले के 414 श्रमिकों ने आवेदन किया था। इनमें से टाइल्स, राज मिस्त्री, बिल्डिंग, फ्रेम वर्क, शटरिंग कार्पेटर, आयरन वेडिंग आदि कार्य के लिए 53 श्रमिकों का चयन हो गया है। अब इनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी महंत लाल ने बताया कि चयनित श्रमिकों के कार्य का परीक्षण 30 जनवरी को राजधानी लखनऊ में किया जाएगा। मेडिकल चेकअप व कार्य की प्रयोगात्मक परीक्षा पास करने वाले श्रमिकों का वीजा व पासपोर्ट तैयार कराया जाएगा। इसके बाद यह श्रमिक इस्राइल के लिए रवाना कर दिए जाएंगे।
एक से पांच साल तक का होगा अनुबंध
चयनित श्रमिकों का अनुबंध कम से कम एक व अधिकतम पांच साल तक के लिए होगा। इस बीच श्रमिक अवकाश लेकर अपने वतन आवागमन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें खुद खर्च उठाना पड़ेगा। सामाजिक सुरक्षा के तहत चिकित्सा बीमा तथा प्रवासी भारतीय बीमा योजना 2017 की सुविधाएं भी श्रमिकों को दी जाएंगी।
इस्राइल सरकार की ओर से भारत सरकार से निर्माण श्रमिकों की डिमांड की गई है। इसी क्रम में इच्छुक निर्माण श्रमिकों से आवेदन मांगा गया था। इसके लिए 414 ने आवेदन किया था। इनमें से 53 श्रमिकों का चयन हो गया है। अब आगे की प्रक्रियाएं पूरी कर इन्हें इस्राइल रवाना किया जाएगा।
महंत लाल, श्रम प्रवर्तन अधिकारी
सरायअकिल बाजार में भगवा झंडे की सिलाई करता दर्जी। संवाद
सरायअकिल बाजार में भगवा झंडे की सिलाई करता दर्जी। संवाद