पश्चिमशरीरा। सदर तहसील के बरोला गांव में बुधवार को चारागाह की करीब 32 बीघा भूमि एसडीएम ने कब्जेदारों के चंगुल से मुक्त करा दी। दो गांवों के करीब 11 लोग 31 साल से इस पर काबिज थे। हर सीजन में धान और गेहूं की बोआई कर रहे थे।
बरोला गांव में राजस्व विभाग की 52 बीघे चारागाह की भूमि है। बभन पूरब व खेरवा निवासी ज्ञान प्रकाश, राम प्रकाश, ओम प्रकाश, संगम गर्ग, बाबूलाल गर्ग, रामेश्वर गर्ग, राम प्रसाद, बिंदेश्वरी, जितेंद्र गर्ग, लवकुश, जय नारायण ने 52 में से 32 बीघे भूमि पर कब्जा कर रखा था। कभी धान तो कभी गेहूं, हर सीजन में लगातार इस भूमि पर खेती हो रही थी। मौजूदा समय में भी धान की फसल खड़ी थी।
मामले की शिकायत एसडीएम सदर आकाश सिंह तक पहुंची। उन्होंने जांच कराई तो अवैध कब्जे की बात सही निकली। कब्जेदारों को कई बार चेतावनी दी, लेकिन कब्जा नहीं हटा। इस पर बुधवार को नायब तहसीलदार ओम प्रकाश को मौके पर भेजा गया। सुबह 10 बजे ही वह पहुंच गए, लेकिन ग्रामीणों के हंगामे और विरोध के कारण कब्जा नहीं हटा सके। दोपहर करीब दो बजे एसडीएम खुद पहुंचे और कार्रवाई शुरू कराई। इस दौरान कई माननीयों की सिफारिशें भी पहुंची, लेकिन इसका कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ा।
राजकीय विद्यालय में रखवाई फसल
फसल कटवाने के लिए दो कंबाइन मशीन लगवाई। देर शाम तक करीब नौ बीघे धान की फसल कट पाई। एसडीएम ने बताया कि धान को पुलिस की सुपुर्दगी में दिया गया है। पुलिस ने इसे क्षेत्र के एक राजकीय विद्यालय में रखवाया है। अब इसे मंडी में बेचकर मिलने वाली रकम सरकारी राजस्व विभाग के खाते में जमा कराई जाएगी।
-
संदेह के घेरे में राजस्व विभाग के अफसर व कर्मचारी
32 बीघा भूमि पर 31 साल तक अवैध कब्जा बिना राजस्व विभाग के अफसरों व कर्मचारियों की सहमति के संभव नहीं है। खास बात यह है कि सदर में तैनात रहे पूर्व उपजिलाधिकारियों ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जबकि शिकायतें लगातार की जा रही थीं। हालांकि इस संबंध में एसडीएम से जब पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।