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महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, हंगामा

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महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, हंगामा
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घरवालों ने स्टाफ नर्स पर सुविधा शुल्क मांगने का लगाया आरोप
चिकित्सकों के समझाने पर शव लेकर घर चले गए परिजन
फोटो-02-
मंझनपुर। जिला महिला अस्पताल में रविवार की सुबह प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत होने के बाद भी उन्हें रेफर करने का खेल किया जाता रहा। परिजनों के हंगामा करने पर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे मृत करार दिया। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ नर्स ने सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर जान-बूझकर जच्चा-बच्चा को मार डाला। मामले की शिकायत सीएमएस से की गई है।
पश्चिम शरीरा कोतवाली के पुनवार गांव का मो. गौस फकीर है। गौस की पत्नी रूखसाना (35) गर्भवती थी। 13 जून को उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित महिला अस्पताल लाया गया। गौस का कहना है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स ने 15 जून को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। उसने पैसा नहीं होने की बात कहकर जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। इस पर उसे जबरन जिला अस्पताल के पास स्थित लवकुश अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया। यहां पर डॉ. डीके मौर्या ने 15 जून को अल्ट्रासाउंड कर अपनी रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में सबकुछ नार्मल लिखा गया। गौस के मुताबिक रिपोर्ट लेकर जब वह स्टाफ नर्स के पास पहुंचा तो उसने एक हजार की रिश्वत मांगी। उसने बताया कि कर्ज लेकर उसने छह सौ अल्ट्रासाउंड में दिया है। आरोप है कि इसी से नाराज नर्स ने जबरन प्रसव कराना चाहा। जच्चा-बच्चा की मौत हो जाने के बाद भी उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। जबकि जिला अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था नहीं है। वह पत्नी को लेकर जिला अस्पताल आया तो चिकित्सकों ने जच्चा-बच्चा की मौत हो जाने की पुष्टि की। इस पर घरवाले हंगामा करने लगे। बाद में चिकित्सकों के समझाने पर वह सीएमएस से शिकायत करके शव लेकर गांव चले गए हैं।
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इनका कहना है
जच्चा-बच्चा की मौत होने की जानकारी मिली है। स्टाफ ने बताया कि गर्भाशय में इंफेक्शन था। महिला को भर्ती करने के लिए कहा गया था लेकिन उसके परिजन तीन दिन से इधर-उधर भटकते रहे। सुविधा शुल्क की बात गलत है। अगर स्टाफ नर्स ने पैसा मांगा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस जिला अस्पताल
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