कादीपुर में निर्माणाधीन मेडिकल कालेज। संवाद
संयुक्त जिला चिकित्सालय के मेडिकल कॉलेज घोषित होने के बाद यहां 40 जूनियर रेजीडेंट की तैनाती हुई थी, इनमें से 15 ने कॉलेज से नाता तोड़ लिया। इनके इस्तीफा देने के बाद यह पद रिक्त हो गए हैं। अब इन पर फिर से भर्ती हो रही है। सिर्फ 26 जेआर ही जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
पिछले साल अप्रैल में संयुक्त जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज घाेषित किया गया था। इसी के बाद जून में यहां 40 जूनियर रेजीडेंट की तैनाती हुई। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने के साथ अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी इन्हें दी जाती है।
40 जेआर की तैनाती हुई तो लगा कि अब स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होंगी। मरीजों को ओपीडी में चिकित्सक उपचार के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वार्डों में भी जरूरत पर तत्काल चिकित्सक पहुंचेंगे।
आंकड़ों के मुताबिक ड्यूटी ज्वाइन तो सभी जेआर ने की थी, लेकिन बाद में 15 चिकित्सकों ने काम करने से मना कर दिया। कोई एमबीबीएस के बाद स्वास्थ्य शिक्षा में परास्नातक करने चला गया तो किसी ने दूसरी जगह नौकरी कर ली।
इसके चलते सिर्फ 26 जूनियर चिकित्सक ही अस्पताल को मिल सके। हालांकि, इनके आने के बाद भी काफी सहूलियत मिली है, लेकिन जेआर के 14 पद रिक्त होने की कमी खल रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए भर्ती शुरू कर दी है।
पिछले साल ज्वाइन करने वाले 14 जेआर ने काम छोड़ दिया था। रिक्त पदों पर भर्ती हो रही है। साक्षात्कार चल रहा है। जल्द ही सभी पदों पर तैनाती हो जाएगी।
डॉ. एसके शुक्ला
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज