मंझनपुर। जिले की 12 साधन सहकारी समितियां ऐसी हैं जो घाटे का शिकार हो गई हैं। उतनी आमदनी नहीं हो रही, जितने खर्चे हैं। हालांकि किसानों को तो खाद आदि यहां से मिल जाती है, लेकिन संकट कर्मचारियों के वेतन का है। कई-कई साल से वेतन के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी कर्मचारियों को नहीं मिली। इससे उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद में कुल 64 साधन सहकारी समितियां हैं। यूरिया, डीएपी, बीज, कीटनाशक की बिक्री से होने वाला मुनाफे के अलावा गेहूं और धान की खरीद में भी समितियों को कमीशन मिलता है। किसानों को दिए जाने वाले ऋण के ब्याज में भी समितियों का हिस्सा रहता है। यही समितियों की आमदनी का जरिया है।
खुद की इनकम से ही समितियों के खर्च निकलते हैं। जिले की 52 समितियां तो ठीक काम कर रहीं है, लेकिन 12 समितियों की हालत बेहद खराब है। वर्ष 2021-22 में आडिट में यह बात निकल कर आई। घाटे में चल रहीं इन समितियों में इतनी भी आमदनी नहीं हो पाती कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान समेत अन्य खर्च निकल सके। इसकी वजह से कर्मचारियों का मनोबल भी अब टूटने लगा है।
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समितियों पर एक नजर
साधन सहकारी समिति- घाटे की रकम
मानपुर गौरा - 2.98 लाख
टेवां - 1.52 लाख
महगांव - एक लाख
जवई - 95 हजार
उदाथू - 71 हजार
बजहा - 36 हजार
पूरे अयोध्या - 29 हजार
शाखा - 23 हजार
बिरौली - 21 हजार
कटरी - 18 हजार
सैयद सरावां - पांच हजार
चरवा - एक हजार
सबसे अच्छा काम करने वाली पांच समितियां
साधन सहकारी समिति - मुनाफे की रकम
कुम्हियावां - 10.55 लाख
मुस्तफाबाद - 9.35 लाख
भरवारी - 4.53 लाख
बिदांव - 4.55 लाख
अजुहा - 5.97 लाख
दिसंबर-2012 के बाद से वेतन नहीं मिला। खेती से दाल-रोटी का इंतजाम हो जाता है। 10 साल से इस उम्मीद के साथ बिना वेतन के जिम्मेदारी निभा रहा हूं कि कभी न कभी तो भुगतान होगा, लेकिन अब यह उम्मीद भी टूटने लगी है।-
नंद किशोर द्विवेदी, लिपिक, साधन सहकारी समिति मानपुर गौरा
जुलाई-2018 के बाद से अब तक वेतन का भुगतान नहीं हुआ। वर्ष 2018 के दो महीने का वेतन भी पिछले साल ही मिला। नौकरी से तो कुछ मिलता नहीं, खेती-बाड़ी से ही घर चल रहा है। एक उम्मीद यह भी है कि आज नहीं तो कल भुगतान हो ही जाएगा।
-मो. हारुन, प्रभारी सचिव, साधन सहकारी समिति जवई
जिले की 52 समितियां बेहतर काम कर रही हैं। यह मुनाफे में भी हैं, लेकिन 12 समितियां घाटे में हैं। इसकी वजह से कुछ दिक्कतें आ रही हैं। समितियों को घाटे से उबारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सदस्यता अभियान भी इसी का एक हिस्सा है।
-रामकिंकर द्विवेदी, एआर कोऑपरेटिव