कासगंज। थैलेसीमिया, जिसे कभी एक लाइलाज और थका देने वाली बीमारी माना जाता था, अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के सामने घुटने टेकती नजर आ रही है। अगर आप या आपका कोई अपना इस स्थिति से जूझ रहा है, तो घबराएं नहीं—सही जानकारी और सावधानी ही इस लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की जांच के लिए अब जिले के मरीजों को दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जिला अस्पताल में इस बीमारी की जांच की सुविधा शुरू होने से मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए एलाइजा रीडर मशीन और जरूरी केमिकल की व्यवस्था पूरी कर ली है।
जिले में पिछले कुछ समय से थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में हर महीने तीन से चार नए मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक जांच की सुविधा न होने के कारण मरीजों को आगरा, अलीगढ़ समेत अन्य जिलों में जाना पड़ता था। जांच और यात्रा में समय के साथ आर्थिक खर्च भी बढ़ जाता था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब स्थानीय स्तर पर जांच होने से मरीजों को जल्द रिपोर्ट मिल सकेगी। इससे बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान कर उपचार शुरू करना आसान होगा। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर जांच होने से मरीजों की स्थिति को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा। डॉक्टरों के मुताबिक थैलेसीमिया रक्त से जुड़ी आनुवांशिक बीमारी है। इसमें शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं और नई कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पातीं। इसके चलते मरीज के शरीर में लगातार खून की कमी बनी रहती है और कई मामलों में बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। समय रहते जांच और नियमित उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
थैलेसीमिया के लक्षण
- जन्म के 6 महीने बाद ही बच्चों में इसके लक्षण दिखने लगते हैं।
- बच्चों के नाखून और जीभ में पीलेपन की शिकायत होने लगती है।
- बच्चों का विकास रुक जाता है।
- उनका वजन नहीं बढ़ता, कमजोरी रहती है।
- बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने के साथ थकान रहती है।
थैलेसीमिया का उपचार
- गंभीर हालात में खून बदलने की जरूरत पड़ने लगती है।
- बोन मैरो ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती है।
वर्जन
जिले में थैलेसीमिया की जांच की व्यवस्था शुरू हो गई है। अस्पताल में रक्त चढ़ाने की व्यवस्था पहले से ही थी। अब ऐसे मरीजों को जिले में ही जांच व इलाज की सुविधा मिल जाएगी- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस