कासगंज। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। खास बात यह है कि भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के इस पर्व पर भद्रा का साया नहीं है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए राखी बांधने और पूजा-पाठ को लेकर विशेष उत्साह है। ऊपर से इस बार त्रिग्रही योगों का संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित भरत राम गौड़ के अनुसार, रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं।
रक्षाबंधन पर इस साल सुकर्मा योग, अभिजीत मुहूर्त, हंस राजयोग, बुधादित्य राजयोग के साथ ही सूर्य, केतु और बुध का त्रिग्रही योग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इन शुभ संयोगों के कारण इस बार रक्षाबंधन का महत्व और बढ़ गया है।
सबसे राहत की बात यह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन भद्रामुक्त रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल में शुभ कार्यों से बचने की परंपरा रही है, इसलिए भद्रा न होने से श्रद्धालुओं को पूजा और राखी बांधने में विशेष सुविधा रहेगी।
राखी बांधने का शुभ समय
पंचांग के अनुसार, राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इस अवधि में बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। हालांकि कुछ समय को अशुभ माना गया है जिनमें राखी बांधने से बचना चाहिए।
राहुकाल : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
यमगण्ड : दोपहर 3:35 बजे से शाम 5:11 बजे तक
ऐसे करें रक्षाबंधन की पूजा
रक्षाबंधन की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, मिठाई और फल रखें। सबसे पहले भगवान गणेश, अपने इष्टदेव, कुल देवी-देवता और बाल गोपाल की पूजा कर उन्हें राखी अर्पित करें।