फोटो11राजकीय पॉलीटेक्निक में आयोजित एआई कार्यशाला में मौजूद छात्र-छात्राएं । संवाद
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कासगंज। तकनीकी शिक्षा को आधुनिक दौर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग (आईआरडीटी) के एजुकेशनल मीडिया रिसर्च सेंटर ने पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग की संभावनाओं का विश्लेषण विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान राजकीय पॉलिटेक्निक सोरोंजी में आयोजित किया। इसमें विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उभरती तकनीकों के प्रति जागरूक किया। डेलॉइट, नोएडा से जुड़े विशेषज्ञ कमलेश व्यास ने कहा कि आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की आधारशिला है जो विद्यार्थी समय रहते डिजिटल कौशल विकसित करेंगे, वही आने वाले रोजगार बाजार में आगे रहेंगे। तकनीकी संस्थानों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को नवाचार और प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने बताया कि पॉलिटेक्निक के विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट, अनुसंधान कार्यों और नवाचार गतिविधियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों को अपनाने, डिजिटल कौशल विकसित करने तथा बदलते रोजगार परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने की सलाह दी। व्याख्यान के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने प्रश्न रखे और विशेषज्ञ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। संस्था के प्रधानाचार्य राजन सिंह ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।