कासगंज। फलों का राजा आम अपनी बेमिसाल खुशबू और स्वाद के लिए हर दिल अजीज है। राष्ट्रीय आम दिवस के खास मौके पर जिले की बात करें, तो यहां वर्तमान में जिले के लगभग 1,715 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम के बाग फैले हुए हैं। यहां की जलवायु में पके आमों की मिठास स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे राज्यों की बड़ी मंडियों तक अपनी खास पहचान बना चुकी है।
कासगंज के बागों में मुख्य रूप से दशहरी, लंगड़ा, चौसा, टिकारी और देशी किस्मों की बंपर पैदावार होती है। सीजन शुरू होते ही यहां से भारी मात्रा में आम बाहरी जिलों और राज्यों में भेजे जाते हैं।
समय के साथ जिले में पारंपरिक तरीके से बड़े बाग लगाने का ट्रेंड भले ही थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन बागवानी का शौक घटा नहीं है। अब जिले में विदेशी और हाइब्रिड प्रजातियों के पौधे लगाने का नया शाैक देखा जा रहा है। महज तीन फीट की ऊंचाई से फल देने वाली इन नई किस्मों को लोग अपने घर के बगीचों और छोटे खेतों में बेहद आसानी से उगा रहे हैं।
विदेशी आम के पाैधे भी लगाए
- हमारा आम का बाग 70-80 वर्ष पुराना है। 40 से 45 बीघा बाग में आम की कई प्रजातियां लगी हैं। जब फसल अच्छी आती है तो अच्छी पैदावार निकलती है। फसल मारी जाने पर नुकसान हो जाता है। आम का बाग लगाना लाभदायक है।- बृजेंद्र सिंह, महावर, बागवान
- मैंने अपने नए बाग में देसी प्रजातियों के पौधे तो लगाए ही हैं। साथ ही विदेशी प्रजाति के टॉमी एटकिंस, जापान की मियाजाकी, थाईलैंड का बनाना मैंगो और ब्रुनेई किंग शामिल हैं। इनमें 3 फुट के पौधे पर भी आम आ रहे हैं।- गोपाल माहेश्वरी, बाग स्वामी
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स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना
सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना का कहना है कि आम केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-ए, सी और एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं।
फोटो 29-राष्ट्रीय आम दिवस की खबर से संबंधित फोटो गोपाल माहेश्वरी । स्रोत संवाद
फोटो 29-राष्ट्रीय आम दिवस की खबर से संबंधित फोटो गोपाल माहेश्वरी । स्रोत संवाद
फोटो 29-राष्ट्रीय आम दिवस की खबर से संबंधित फोटो गोपाल माहेश्वरी । स्रोत संवाद