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Kasganj News: पोथियों की परंपरा, पन्नों पर पीढ़ियां

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फोटो 39 - सोरोंजी में तीर्थपुरोहितों के यहां संर​क्षित पो​थियां। संवाद
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कासगंज। मुगल काल में बादशाह अकबर ने तीर्थनगरी सोरोंजी से ही गंगाजल आगरा मंगवाया था। गुरुनानक देव एवं चैतन्य महाप्रभु के चरण भी इस पावन धरती पर पड़े थे। ये ऐतिहासिक तथ्य तीर्थ पुरोहितों की पोथियों में दर्ज हैं। एक-दो नहीं, बल्कि 600 वर्षों से तीर्थनगरी आकर गंगा स्नान व श्राद्धकर्म करने वाले श्रद्धालुओं का ब्योरा बाकायदा इन पोथियों में सहेजा गया है। अनुमान के मुताबिक, तीर्थ पुरोहितों के पास करीब 30 हजार पोथियां हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत कई अन्य राज्यों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्योरा दर्ज है।
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तीर्थनगरी के साहित्यकार डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित बताते हैं कि भगवान वराह की भूमि सोरोंजी कई अद्भुत स्थानों, परंपराओं व सांस्कृतिक धरोहरों को अपने आंचल में समेटे है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के मन में अपने वंश की जानकारी पाने का कौतूहल रहता है। वे अपने इलाके के तीर्थ पुरोहितों से मिलते हैं और वंशावली की जानकारी लेते हैं। साथ ही अपनी आमद भी दर्ज कराते हैं। यहां पोथी लेखन की परंपरा करीब 600 वर्ष पुरानी है। पहले ताम्रपत्र पर इसका लेखन होता था। अब कागज की पोथियां हैं। पोथी लेखन मुड़िया लिपि में किया जाता है। तीर्थ पुरोहितों के परिवारों में आज भी इस लिपि के जानकार हैं। स्थानीय भाषा का भी पोथी लेखन में प्रयोग रहता है।
डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित कहते हैं कि सोरोंजी से अकबर के आगरा दरबार में गंगाजल ले जाने का जिक्र तीर्थ पुरोहितों की पोथियों के अलावा अकबर के दरबारी अबुल फजल की किताब ‘’आईन-ए-अकबरी’’ में भी दर्ज है। वे बताते हैं कि पोथियों में वंशावली के साथ जातियों, गोत्र और उप-गोत्र का भी जिक्र रहता है। विभिन्न राजवंशों की मुद्राएं, हस्तलेखन, दानपत्र, अंगूठे के निशान और पंजों के निशान भी पोथियों में मौजूद हैं। संवाद
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फोटो 39 - सोरोंजी में तीर्थपुरोहितों के यहां संरक्षित पोथियां। संवाद

फोटो 39 - सोरोंजी में तीर्थपुरोहितों के यहां संरक्षित पोथियां। संवाद

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