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Kasganj News: रातभर गूंजती रहीं चीखें, सुबह एक साथ उठीं चार अर्थियां तो रो पड़ा पूरा गांव

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फोटो 19- सिढ़पुरा के गांव दहेली बुजुर्ग में शव पहुंचने पर चीत्कार करते रामदीन की बड़ी बेटी सुधा
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सिढ़पुरा (कासगंज)। बुलंदशहर के नरौरा में दिल्ली-बदायूं मार्ग पर शुक्रवार दोपहर हुए दर्दनाक हादसे में पिता-पुत्र समेत गांव दहेली बुजुर्ग के पांच लोगों की मौत हो गई। देर रात 11 बजे शव गांव लाए गए। एंबुलेंस से जब एक-एक कर पांचों शव उतरे तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। परिजनों का दर्द देखकर ढाढ़स बंधाने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। मृतकों में चार लोग एक ही परिवार के थे जबकि एक शव ईको कार स्वामी का था।
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गांव के सन्नाटे में रातभर परिजनों की चीखें गूंजती रहीं। सुबह 10:30 बजे सबसे पहले मासूम प्रगति के शव को बच्चों के श्मशान में दफनाया गया। इसके बाद परिवार के मुखिया रामदीन (50), उनके छोटे पुत्र लोकेंद्र (26) और रामदीन की बड़ी पुत्रवधू बबीता (35) की अर्थियां एक साथ उठीं। श्मशान घाट पर तीनों की चिताएं पास-पास सजाई गईं। बड़े बेटे प्रवीण ने जब एक साथ पिता, भाई और पत्नी की चिताओं को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं।

मुखाग्नि देते समय प्रवीण के हाथ भी कांप उठे और वह फूट-फूटकर रोने लगा। ग्रामीण और रिश्तेदार बार-बार उनको संभाल रहे थे लेकिन एक साथ पूरे परिवार के उजड़ जाने का यह दर्द वह सहन नहीं कर पा रहा था। इससे पहले मासूम भतीजी प्रगति के शव को दफनाते समय भी वह बार-बार बेसुध हो रहा था।
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ईको कार स्वामी शिवशेखर के घर में भी कोहराम मचा रहा। उनके शव को कादरगंज गंगाघाट ले जाया गया जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवारों को ढाढ़स बंधाने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

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ऐसे हुआ हादसा
थाना सिढ़पुरा क्षेत्र के गांव दहेली बुजुर्ग निवासी रामदीन (50) अपने परिवार के साथ नवरात्र पर मां भगवती के दर्शन के लिए निकले थे। उन्होंने गांव निवासी शिवशेखर मिश्रा की ईको वैन किराये पर ली थी। वे परिवार सहित पहले छतारी क्षेत्र स्थित चौंढेरा में प्रसिद्ध देवी मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना के बाद सभी लोग नरौरा थाना क्षेत्र के बेलौन देवी मंदिर में माथा टेकने और मुंडन संस्कार के लिए जा रहे थे। मंदिर से तीन किलोमीटर पहले ईको कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में परिवार के मुखिया रामदीन, लोकेंद्र, लोकेंद्र की एक वर्षीय पुत्री प्रगति, बबीता (35) और कार स्वामी व चालक शिवशेखर मिश्रा की दर्दनाक माैत हो गई।

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उन्हें तो मौत खींच ले गई...
सिढ़पुरा (कासगंज)। ईको कार स्वामी शिवशेखर मिश्रा की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव जब घर पहुंचा तो उनकी पत्नी शकुंतला बार-बार विलाप करते हुए कह रही थीं कि उन्हें तो मौत खींच ले गई...। छोटे बेटे नितिन को भी इस बात का मलाल है कि वह पिता से आखिरी बार मिल भी नहीं पाया।
नितिन ने बताया कि पिता शुक्रवार सुबह जल्दी बेलौन के लिए निकल गए थे। उस समय वह सो रहा था। इस कारण पिता से मुलाकात नहीं हो सकी। उसे क्या पता था कि पिता कभी घर लौटकर नहीं आएंगे। बड़े बेटे सचिन ने बताया कि पिता बिल्डिंग मैटेरियल का काम करते थे। वे ईको कार को कभी किराये पर नहीं चलाते थे लेकिन रामदीन से अच्छे रिश्ते होने और विशेष अनुरोध करने पर वह खुद कार लेकर जाने के लिए तैयार हो गए थे। संवाद

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गांव में नहीं जला चूल्हा, मवेशी भी रहे भूखे
सिढ़पुरा (कासगंज)। हादसे की खबर शुक्रवार को जैसे ही गांव पहुंची, मातम पसर गया। पूरा गांव जैसे ठहर गया। किसी भी घर में चूल्हे तक नहीं जले। मवेशियों को भी समय पर चारा नसीब नहीं हुआ। भूख-प्यास भूलकर गांववासी बस पीड़ितों के आंसू पोंछने में जुटे रहे। रामदीन और शिवशेखर के घर पर ग्रामीणों का तांता लगा रहा। ढाढ़स बंधाने आई महिलाओं के रोने से माहौल और गमगीन हो गया। शनिवार को जब एक साथ अंतिम यात्रा निकली तो पूरा गांव रो पड़ा। गांव के प्रेम सिंह और सुरजीत वर्मा ने रुंधे गले से बताया कि इस भयावह दुर्घटना से पूरा गांव भीतर तक टूट चुका है। संवाद

फोटो 19- सिढ़पुरा के गांव दहेली बुजुर्ग में शव पहुंचने पर चीत्कार करते रामदीन की बड़ी बेटी सुधा

फोटो 19- सिढ़पुरा के गांव दहेली बुजुर्ग में शव पहुंचने पर चीत्कार करते रामदीन की बड़ी बेटी सुधा

फोटो 19- सिढ़पुरा के गांव दहेली बुजुर्ग में शव पहुंचने पर चीत्कार करते रामदीन की बड़ी बेटी सुधा

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