कासगंज। जिले में महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली डिसफंक्शनल यूटेराइन ब्लीडिंग (डीयूबी) के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। जिला अस्पताल में हर माह 100 से अधिक महिलाएं अत्यधिक या अनियमित मासिक रक्तस्राव की शिकायत लेकर पहुंच रही हैं। विशेषज्ञों ने इस समस्या को सामान्य समझकर नजरअंदाज करने के गंभीर परिणामों के प्रति आगाह किया है, जो एनीमिया सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। समय पर निदान और उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू के अनुसार, डीयूबी की स्थिति में सामान्य मासिक धर्म चक्र की तुलना में अत्यधिक, लंबे समय तक या अनियमित रक्तस्राव होता है। यह समस्या विशेष रूप से किशोरावस्था और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के आसपास की महिलाओं में अधिक पाई जाती है। लगातार होने वाले रक्तस्राव के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा में कमी आ जाती है, इससे थकान, कमजोरी, चक्कर आना जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं।
डॉ. अंजू ने बताया कि डीयूबी के पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनमें हार्मोनल असंतुलन, ओव्यूलेशन का न होना, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), थायरॉइड विकार, कुछ विशेष दवाओं का सेवन और हार्मोनल गर्भनिरोधकों का उपयोग प्रमुख हैं। उपचार शुरू करने से पहले, गर्भावस्था, संक्रमण और अन्य स्त्री रोग संबंधी संभावित कारणों की जांच करना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. अंजू ने महिलाओं को सलाह दी है कि यदि मासिक धर्म में लगातार अनियमितता, अत्यधिक रक्तस्राव, कमजोरी या चक्कर आने जैसी शिकायतें हों, तो इन्हें सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय रहते स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना और आवश्यक जांचें करवाना गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। शीघ्र निदान और उपचार से डीयूबी को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
डीयूबी के प्रमुख लक्षण
-सात दिन से अधिक समय तक मासिक धर्म रहना
-21 दिन से पहले या 35 दिन से अधिक अंतराल पर पीरियड आना
-मासिक धर्म के बीच स्पॉटिंग या रक्तस्राव होना
-बड़े रक्त के थक्के निकलना
-अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना
-पेट या श्रोणि (पेल्विक) क्षेत्र में लगातार दर्द
ऐसे करें बचाव
- मासिक धर्म में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें
- अत्यधिक रक्तस्राव होने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें
- आयरन और प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें तथा पर्याप्त पानी पिएं
- बिना चिकित्सकीय सलाह के हार्मोनल दवाओं का सेवन न करें
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार पूरा करें