कासगंज। जन्म से मूक-बधिर या कम सुनने वाले बच्चों के परिजनों के लिए राहत की खबर है। कॉक्लियर इंप्लांट तकनीक की मदद से अब ऐसे बच्चे सामान्य जीवन जी सकेंगे। 0 से 5 साल तक के ऐसे बच्चों के ऑपरेशन का खर्च सरकार उठाएगी। विभाग के माध्यम से छह लाख रुपये का अनुदान मिलेगा।जन्म के समय बड़ी संख्या में बच्चे ऐसे भी पैदा होते है, जिनमें कोई न कोई जन्मजात रोग होता है। इनमें से ही मूक-बधिर बच्चे भी शामिल होते हैं। ऐसे बच्चों के लिए सरकार की ओर से शल्य चिकित्सा अनुदान योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत पांच साल तक के बच्चे का कॉक्लियर इंप्लांट एक छोटा सा ऑपरेशन होता है। समय पर ऑपरेशन होने पर बच्चे सुनने लगते हैं और धीरे-धीरे बोलने भी लगते हैं। ऑपरेशन से पहले बच्चे की बेरा जांच कराई जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसे सुनने की क्षमता विकसित कराई जा सकती है। जांच रिपोर्ट संतोषजनक आने पर ही ऑपरेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
ऑपरेशन के बाद उनकी सुनने फिर बोलने की क्षमता तेजी से विकसित होती है। शासन इस योजना को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है और इलाज पर आने वाला लगभग 6 लाख रुपये का खर्च वहन करने की व्यवस्था कर दी गई है। दिव्यांग कल्याण विभाग की ओर से पात्र बच्चों को अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। दिव्यांग कल्याण अधिकारी हेमेंद्र स्वरूप ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए शल्य चिकित्सा अनुदान योजना संचालित हो रही है। पात्र परिवार आवश्यक दस्तावेज के साथ इस योजना के लिए अपने आवेदन कर सकते हैं।