घटना से परिजन में कोहराम मच गया।
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कासगंज के सिढ़पुरा क्षेत्र के गांव दहेली बुजुर्ग में शनिवार की भोर उदासी और चीत्कार लेकर आई। शुक्रवार की देर रात करीब 11 बजे जब हादसे का शिकार हुए पांच लोगों के शव एक साथ एंबुलेंस से गांव पहुंचे, तो परिजन का सब्र टूट गया। मृतकों में चार लोग एक ही परिवार के थे, जबकि एक शव ईको कार के मालिक का था। रात भर शवों के पास परिजन की बेसुध कर देने वाली चीखें गूंजती रहीं। ढांढस बंधाने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें भी इस खौफनाक मंजर को देखकर छलक उठीं।
गांव के रामदीन का परिवार शिवशेखर मिश्रा की ईको कार से बुलंदशहर के बेलोन माता मंदिर में मुंडन संस्कार के लिए निकला था। गंतव्य से महज 3 किलोमीटर पहले कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में कार स्वामी व चालक शिवशेखर, रामदीन, लोकेंद्र, बबिता और मासूम प्रगति की सांसें थम गईं। सुबह करीब 10:30 बजे सबसे पहले मासूम प्रगति के शव को बच्चों के श्मशान में दफनाया गया।
इसके बाद रामदीन, उनके बेटे लोकेंद्र और बहू बबिता की अर्थियां एक साथ उठीं। श्मशान घाट पर तीनों की चिताएं पास-पास सजाई गईं। रामदीन के बड़े बेटे प्रवीण ने जब एक साथ पिता, भाई और पत्नी की चिताओं को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स द्रवित हो उठा।
गंगाघाट पर हुआ कार स्वामी का अंतिम संस्कार
हादसे का शिकार हुए ईको कार स्वामी शिवशेखर के घर में भी कोहराम मचा रहा। उनके शव को कादरगंज गंगाघाट ले जाया गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस दुखद घड़ी में ढांढस बंधाने के लिए आसपास के गांवों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे।