सिढ़पुरा। जून माह समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक मानसून की प्रभावी दस्तक नहीं होने से क्षेत्र के किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। भीषण गर्मी और वायुमंडल का अधिक तापमान धान की खेती पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। लगातार सिंचाई करने के बावजूद धान की पौध अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रही है, जिससे समय पर रोपाई का संकट गहराता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए जून के दूसरे सप्ताह से रोपाई शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन इस बार मौसम साथ नहीं दे रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों में नमी अधिक समय तक नहीं टिक रही, जिससे बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
किसान सुमित मिश्रा, आलोक, वीरेश राठौर, कृष्ण कुमार शर्मा, कमल सिंह, विनीत शाक्य और जय सिंह ने बताया कि पर्याप्त पानी देने के बाद भी धान की पौध का विकास संतोषजनक नहीं हो रहा है। यदि मानसून में और देरी हुई तो रोपाई का समय निकलने का खतरा है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रीतेश कुमार ने बताया कि वर्तमान मौसम धान की फसल के अनुकूल नहीं है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जल्दबाजी में रोपाई करने के बजाय वर्षा का इंतजार करें। उनका अनुमान है कि 1 जुलाई के आसपास अच्छी वर्षा शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में रोपाई करने पर सिंचाई की लागत बढ़ेगी, पौधों पर कीटों का प्रकोप भी अधिक रहेगा और फसल की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मानसून में हो रही देरी ने किसानों की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। अब किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि समय रहते धान की रोपाई शुरू हो सके और खरीफ की फसल सुरक्षित रह सके।
किसानों की बात :
धान की रोपाई तो शुरू कर दी है, लेकिन बारिश नहीं होने से पंपसेट चलाना पड़ रहा है। डीजल पर हर दिन हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती करना महंगा पड़ जाएगा। - ज्ञान चंद्र किसान
हमने अभी रोपाई शुरू नहीं की है, क्योंकि खेत में पर्याप्त पानी नहीं है। सिंचाई के साधन सीमित हैं। अब पूरी उम्मीद मानसून की बारिश से ही है, तभी समय पर रोपाई हो सकेगी। - महाराज सिंह किसान