फोटो28मोहनपुरा में सुबह के समय छाया कोहरा। संवाद
मोहनपुरा। पिछले कुछ दिनों से रात और सुबह के समय खेतों में नमी का स्तर अधिक बने रहने से गेहूं की फसलों में फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर सिंचाई और फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है।कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के पादप संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. रितेश कुमार ने बताया कि रात्रि में कम तापमान और अधिक नमी से पत्तियों पर ओस की परत जमा हो जाती है। इससे झुलसा, पर्णदाग, डाउनी मिल्ड्यू और ब्लाइट जैसे फफूंद जनित रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।पत्तियों के लंबे समय तक गीले रहने से पौधों का प्रकाश संश्लेषण धीमा हो जाता है, जिससे पत्तियों की वृद्धि, नई टहनियों का विकास और दानों के भराव पर प्रतिकूल असर पड़ता है। फूल निकलने या दाना बनने वाली फसलों में पैदावार घटने की आशंका रहती है।सब्जियों में अधिक नमी से सड़न, नरमी, फल का फटना और तना गलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा एफिड, व्हाइटफ्लाई और मिली बग जैसे कीट तेजी से पनप सकते हैं।डॉ. रितेश ने सलाह दी कि गेहूं की फसल टिलरिंग से वोल्टिंग अवस्था तक है, इसलिए किसानों को फसलों का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करना चाहिए। कोहरे के बाद हल्की सिंचाई करने से जड़ों की सक्रियता बढ़ती है और पौधों का तापमान संतुलित रहता है। फफूंद जनित रोगों की आशंका होने पर जैविक या रासायनिक फफूंद नाशकों का समय पर छिड़काव फसल को सुरक्षित रख सकता है।